रूस-अफगानिस्तान की बढ़ती दोस्ती से पाकिस्तान में बेचैनी, क्या बदलने वाला है दक्षिण एशिया का भूगोल?

Global Bharat 29 May 2026 03:22: PM 2 Mins
रूस-अफगानिस्तान की बढ़ती दोस्ती से पाकिस्तान में बेचैनी, क्या बदलने वाला है दक्षिण एशिया का भूगोल?

दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे रूस और अफगानिस्तान अब करीब आते दिखाई दे रहे हैं। इस बदलते समीकरण को लेकर पाकिस्तान में भी हलचल तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि भारत, रूस और अफगानिस्तान के बीच बन रही नई समझ पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

सोवियत संघ और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष की कहानी पूरी दुनिया ने देखी थी। लेकिन अब रूस उस दौर से आगे बढ़ चुका है। बीते कुछ समय में रूस और तालिबान सरकार के बीच रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। जुलाई 2025 में रूस ने तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता देकर बड़ा संदेश दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई अहम बैठकों का दौर शुरू हुआ।

हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि तालिबान के रक्षा मंत्री ने रूस से आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की मांग की है। साथ ही दोनों देशों के बीच सुखोई लड़ाकू विमान और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी चर्चा हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी एयरफोर्स और एयर डिफेंस क्षमता की कमी रही है। इसी वजह से पाकिस्तान कई बार एयरस्ट्राइक कर अपनी ताकत दिखाता रहा है। लेकिन अगर तालिबान को आधुनिक रक्षा प्रणाली मिलती है, तो क्षेत्रीय समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

दावा किया जाता है कि पाकिस्तान के कई इलाकों में आज भी तालिबान समर्थक नेटवर्क सक्रिय हैं। खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक कट्टरपंथी संगठनों और लड़ाकों की मौजूदगी की चर्चा होती रही है। वहीं तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर भी पाकिस्तान लंबे समय से चिंता जताता रहा है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर अफगानिस्तान सैन्य रूप से मजबूत होता है, तो पाकिस्तान के भीतर अलगाववादी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में पहले से अलग पहचान और स्वायत्तता की मांग उठती रही है। इसी वजह से पाकिस्तान के भीतर अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

इसी बीच भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों को लेकर भी चर्चा तेज है। अफगानिस्तान के कई मंत्री भारत का दौरा कर चुके हैं और भारत की खुलकर तारीफ करते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह दावा भी किया जा रहा है कि भारत, रूस और अफगानिस्तान के बीच बेहतर संबंधों को बढ़ावा देने में भूमिका निभा रहा है।

रूस के लिए भी यह गठजोड़ रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। रूस की सबसे बड़ी चिंता ISIS-K को लेकर है। यह संगठन अफगानिस्तान और मध्य एशिया में तेजी से सक्रिय हो रहा है। रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस के प्रमुख अलेक्जेंडर बोर्तनिकोव ने भी चेतावनी दी थी कि ISIS-K मध्य एशिया और रूस में भर्ती अभियान चला रहा है और बड़े हमलों की तैयारी कर सकता है।

ऐसे में रूस चाहता है कि तालिबान अफगानिस्तान के उत्तरी इलाकों और मध्य एशिया की ओर जाने वाले रास्तों पर मजबूत नियंत्रण बनाए रखे, ताकि ISIS-K जैसे संगठनों को रोका जा सके।

अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या दक्षिण एशिया के भूगोल को बदलने वाला कोई बड़ा रणनीतिक रोडमैप तैयार हो चुका है? और क्या पाकिस्तान इस बदलते समीकरण का सामना कर पाएगा, या फिर रूस-अफगानिस्तान की नई दोस्ती क्षेत्र की राजनीति में नया अध्याय लिखेगी।

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