Asim Munir Visit Saudi Arabia : मिडिल ईस्ट में अब्राहम अकॉर्ड्स के संभावित विस्तार की चर्चा ने पाकिस्तान की सत्ता और सैन्य गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से बढ़ते कूटनीतिक दबाव के बीच पाकिस्तान में सरकार और सेना के भीतर नई रणनीतिक खींचतान शुरू हो गई है. अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, वाशिंगटन और उसके सहयोगी देशों की तरफ से इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने को लेकर इस्लामाबाद पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिससे पाकिस्तानी नेतृत्व गहरे असमंजस में है.
इसी तनावपूर्ण माहौल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर का सऊदी अरब दौरा बेहद अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि दोनों नेता रियाद के रुख को समझने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए यह दौरा कर रहे हैं. पाकिस्तान अच्छी तरह जानता है कि सऊदी अरब की सहमति के बिना इजरायल को मान्यता देना उसके लिए राजनीतिक और धार्मिक रूप से बेहद खतरनाक कदम साबित हो सकता है.
दरअसल, अब्राहम अकॉर्ड्स की शुरुआत 2020 में ट्रंप प्रशासन के दौरान हुई थी, जब यूएई और बहरीन जैसे देशों ने इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे. अब इसके अगले चरण की चर्चाओं ने पाकिस्तान में नई चिंता पैदा कर दी है. सूत्रों के मुताबिक इस्लामाबाद की रणनीति साफ है कि ब्पहले सऊदी अरब, फिर पाकिस्तान. यानी पाकिस्तान चाहता है कि शुरुआती धार्मिक और कूटनीतिक प्रतिक्रिया का सामना पहले रियाद करे.
उधर पाकिस्तान के भीतर धार्मिक संगठनों और कट्टरपंथी समूहों ने सरकार और सेना को खुली चेतावनी दे दी है. ईद के खुतबों में कई मौलवियों ने इजरायल से किसी भी समझौते के खिलाफ फतवे जारी किए हैं. कट्टरपंथी संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने अब्राहम अकॉर्ड्स की दिशा में कदम बढ़ाया तो देशभर में उग्र आंदोलन भड़क सकता है.