नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति कभी आश्चर्य से भरपूर रहती है. हाल ही में संपन्न नगर निगम चुनावों ने राज्य को गठबंधनों की एक जटिल भूलभुलैया में बदल दिया है. ऐसा ही एक नजारा कल्याण-डोंबिवली में देखने को मिला, जहां एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) से अपनी पुरानी दुश्मनी को दरकिनार कर एक गठबंधन किया, ताकि भाजपा को मेयर पद न मिल सके.
122 सदस्यीय कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और 50 सीटें जीतीं, जो शिंदे का गढ़ माना जाता है. वहीं शिंदे गुट की शिवसेना को 53 सीटें मिलीं, MNS को 5 सीटें और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 11 सीटें हासिल हुईं. निगम पर नियंत्रण के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 62 सीटों की जरूरत है.
62 पार्षदों की जरूरत, शिंदे गुट के पास 58
हालांकि महाराष्ट्र में शिंदे की शिवसेना और भाजपा महायुति गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन कल्याण-डोंबिवली में दोनों पार्टियां मेयर पद को लेकर आमने-सामने हैं. बुधवार को कोकण भवन में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे ने राज ठाकरे की पार्टी के साथ गठबंधन की पुष्टि की. इससे उनका कुल आंकड़ा 58 हो गया है, जो बहुमत (62) से सिर्फ चार सीटें कम है.
बैठक में श्रीकांत ने संकेत दिया कि उद्धव गुट के चार कॉरपोरेटर इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं. उद्धव गुट के कुछ कॉरपोरेटरों का समर्थन मिलने पर गठबंधन आसानी से बहुमत पार कर लेगा और भाजपा के साथ सत्ता साझेदारी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.
पोस्ट-पोल ट्विस्ट भाजपा के लिए बड़ा झटका
यह पोस्ट-पोल ट्विस्ट भाजपा के लिए बड़ा झटका है, जो 2.5 साल के मेयर पद की साझेदारी की मांग कर रही है. लेकिन शिंदे गुट पूरे कार्यकाल के लिए मेयर पद अपने पास रखना चाहता है. यह घटनाक्रम तब हो रहा है, जब मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) पर भी सस्पेंस बना हुआ है, जहां भाजपा-शिंदे शिवसेना गठबंधन ने ठाकरे परिवार के लगभग तीन दशक पुराने दबदबे को खत्म कर दिया है.