MT Settebello Ship Attack : देवरिया जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले रामजी चौरसिया के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है . उनका बेटा शिवानंद चौरसिया, जो मर्चेंट नेवी में नौकरी कर अपने परिवार का सहारा बना था, अब इस दुनिया में नहीं रहा. अमेरिकी हमले में उसकी मौत की खबर मिलते ही पूरे परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं.
रोते-बिलखते रामजी चौरसिया कहते हैं, मेरे बेटे शिवानंद की मर्चेंट नेवी में 9 महीने पहले नौकरी लगी थी. उसकी नौकरी लगने पर पूरे परिवार में खुशी का माहौल था. हमने 6 लाख रुपये का कर्ज लेकर उसका समुद्री पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज बनवाए थे. हमें उम्मीद थी कि बेटा मेहनत कर परिवार की जिंदगी बदल देगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.
शिवानंद की पहली जॉइनिंग सिंगापुर में हुई थी. वहां से वह पहली बार ऑयल टैंकर जहाज MT सेत्तेबेल्लो पर सवार हुआ था. परिवार को क्या पता था कि उसकी पहली समुद्री यात्रा ही आखिरी साबित होगी. बुधवार को अमेरिकी हमले में शिवानंद की मौत की खबर आई तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई.
शिवानंद अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे. उनके पीछे पत्नी, 5 साल का बेटा और 2 साल की मासूम बेटी हैं. बच्चों को अभी यह भी समझ नहीं है कि उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है. घर में जहां कुछ महीने पहले बेटे की नौकरी को लेकर खुशियां थीं, वहीं अब सिर्फ सन्नाटा और चीख-पुकार सुनाई दे रही है.
रामजी चौरसिया की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। वे कहते हैं, अब हमारे परिवार का क्या होगा, यह भगवान ही जानता है. जिस बेटे के सहारे भविष्य के सपने देखे थे, आज वही हमें हमेशा के लिए छोड़कर चला गया.