रिक्शा चलाने वाले पिता का बेटा बना IAS! एक अपमान ने बदल दी गोविंद जायसवाल की किस्मत, पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक किया

Amanat Ansari 01 Jun 2026 03:45: PM 1 Mins
रिक्शा चलाने वाले पिता का बेटा बना IAS! एक अपमान ने बदल दी गोविंद जायसवाल की किस्मत, पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक किया

नई दिल्ली: बनारस के गोविंद जायसवाल ने साबित कर दिया कि इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल आसान हो जाती है. रिक्शा चलाने वाले पिता के बेटे गोविंद जायसवाल ने पहले ही प्रयास में UPSC की परीक्षा पास कर 48वीं रैंक हासिल की और IAS अधिकारी बन गए. आज वे दिल्ली के शिक्षा मंत्रालय में हायर एजुकेशन विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं.

संघर्ष भरी कहानी

गोविंद बनारस में रहते थे. उनके पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पालते थे, मां गृहिणी थीं और तीन बहनें भी थीं. जब गोविंद 7वीं कक्षा में पढ़ते थे, तभी उनकी मां का ब्रेन हेमरेज से निधन हो गया. परिवार की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई. एक छोटी-सी कोठरी में पिता और तीन बहनों के साथ जीवन गुजरना बेहद मुश्किल हो गया था. पिता चाहते थे कि गोविंद भी ऑटो चलाकर परिवार की मदद करें, लेकिन गोविंद कुछ बड़ा बनना चाहते थे.

अपमान बना प्रेरणा

जब गोविंद 11 साल के थे, एक अमीर दोस्त के घर गए. वहां लोगों ने उनके पिता के रिक्शा चलाने पर ताने मारे और कहा, ''तुम्हें भी यही करना है.'' यह अपमान गोविंद के दिल पर गहरी चोट बनकर बैठ गया. उसी दिन उन्होंने ठान लिया कि वह रिक्शा नहीं चलाएंगे, कुछ करके दिखाएंगे.
गांव के एक बुजुर्ग से UPSC और IAS के बारे में जानकर IAS बनने का लक्ष्य तय कर लिया.

पिता का असीम त्याग

पिता ने अपनी जमीन बेचकर बेटे को दिल्ली भेजा. दिल्ली में गोविंद ने मैथ्स की ट्यूशन पढ़ाकर पैसे कमाए, अक्सर एक समय का खाना छोड़कर किताबें खरीदीं और किराए का कमरा चलाया. कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने 2006 में पहली बार में ही UPSC क्रैक कर लिया. गोविंद जायसवाल की कहानी लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है. यह बताती है कि चाहे शुरुआत कितनी भी छोटी क्यों न हो, मेहनत और संकल्प से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है.

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