नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 2016 के एक रेप मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा को घटाकर 20 साल कर दिया है. अदालत ने दोषी के अच्छे जेल आचरण और सुधार की संभावना को आधार बनाते हुए यह राहत दी है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि अपराध के समय दोषी की उम्र महज 25 साल थी.
उसके खिलाफ कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जेल में लगभग 10 साल (रिमिशन सहित) बिताने के दौरान उसका आचरण अच्छा रहा है. कोर्ट ने हालांकि अपराध की गंभीरता पर भी जोर दिया. बेंच ने कहा कि यह जघन्य अपराध न सिर्फ पीड़िता बल्कि पूरे समाज के खिलाफ था. समाज में पितृसत्तात्मक सोच अभी भी बनी हुई है और ऐसे अपराध लगातार हो रहे हैं.
मामला 7 सितंबर 2016 का है, जब दिल्ली रेलवे स्टेशन से रिक्शा लेने वाली एक महिला को दो आरोपियों ने निर्जन जगह पर ले जाकर बलात्कार किया था. ट्रायल कोर्ट ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था.
सुप्रीम कोर्ट ने 25 हजार रुपए का जुर्माना पीड़िता को देने का आदेश हालांकि बरकरार रखा. अदालत ने कहा कि सजा में संतुलन होना चाहिए- जहां जरूरी हो सख्ती और जहां उचित हो दया. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में महिलाओं की सुरक्षा और बलात्कार जैसे अपराधों पर सख्ती को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है.