लखनऊ : उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कांग्रेस के साथ आने की दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं. तीन अक्टूबर को स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई नेता 10 जनपथ पहुंचे, जिसके बाद उनके कांग्रेस में शामिल होने और अपनी पार्टी के विलय की चर्चा तेज हो गई.
मौर्य की राजनीति का यूपी में लंबा सफर रहा है. वह बसपा, भाजपा और समाजवादी पार्टी में रह चुके हैं और 2024 में अपनी पार्टी बनाई थी. ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले उनका कांग्रेस के साथ आना विपक्षी खेमे के समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है.
मौर्य ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस को विपक्ष का प्रमुख विकल्प बताते हुए राहुल गांधी को देश का अगला प्रधानमंत्री देखने की इच्छा जताई है. वहीं, कांग्रेस की ओर से पवन खेड़ा ने संकेत दिया है कि गठबंधन की प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है.
सबसे बड़ा सवाल यूपी को लेकर है. 2027 में 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है और विपक्षी दलों के बीच तालमेल पहले से ही चर्चा के केंद्र में है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के रिश्ते, सीटों का बंटवारा और गैर-भाजपा दलों को साथ लाने की कोशिशें चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं.
हाल ही में इंडिया गठबंधन की बैठक में भी विपक्षी एकता और गठबंधन का दायरा बढ़ाने पर चर्चा हुई थी. अब स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने की स्थिति में यूपी की पिछड़ा-दलित राजनीति और विपक्षी गठजोड़ की दिशा पर सबकी नजर रहेगी.