Mahal : आगरा स्थित ताजमहल को लेकर लंबे समय से चल रही बहस एक बार फिर न्यायालय पहुंच गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल से जुड़ी एक याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जवाब तलब किया है. अदालत ने दोनों पक्षों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
यह मामला उस सिविल मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें दावा किया गया है कि ताजमहल मूल रूप से 'तेजो महालय' नाम का भगवान शिव का प्राचीन मंदिर था, जिसे बाद में मुगल सम्राट शाहजहां के शासनकाल में मुमताज महल के मकबरे में बदल दिया गया.
याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया जाए, जो ताजमहल का निरीक्षण कर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करे, ताकि उसके ऐतिहासिक स्वरूप से जुड़े तथ्यों की जांच की जा सके. सोमवार, 6 जुलाई को जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
गौरतलब है कि ताजमहल को 'तेजो महालय' बताए जाने का दावा कई वर्षों से विभिन्न मंचों पर उठता रहा है, लेकिन ASI लगातार यह कहता रहा है कि ताजमहल 17वीं शताब्दी में शाहजहां द्वारा मुमताज महल की याद में बनवाया गया मकबरा है. फिलहाल हाईकोर्ट ने इस चरण में किसी दावे की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं की है. अब केंद्र सरकार और ASI के जवाब के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी.