नई दिल्ली: पाकिस्तान में हाल की आतंकी घटनाओं ने सुरक्षा की घंटी बजा दी है, खासकर श्रीलंका क्रिकेट टीम के दौरे के बीच. इस्लामाबाद में मंगलवार को एक न्यायिक परिसर के बाहर हुए आत्मघाती हमले के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ियों की सुरक्षा को चाक-चौबंद कर दिया गया है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के चेयरमैन और गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने खुद टीम अधिकारियों से स्टेडियम में जाकर भेंट की और उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा देते हुए पूरी सुरक्षा का वादा किया.
इस्लामाबाद के जी-11 क्षेत्र में दोपहर करीब 12:39 बजे एक आत्मघाती हमलावर ने कोर्ट कॉम्प्लेक्स के गेट पर पुलिस वाहन के पास खुद को उड़ा लिया. इस धमाके में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि 35 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं. हमलावर अंदर घुसने में नाकाम रहा, इसलिए बाहर ही विस्फोट कर दिया.
पाकिस्तानी सेना ने इसे अफगानिस्तान से संचालित नेटवर्क का काम बताया है, जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़ा हो सकता है. इसी बीच, उत्तरी पाकिस्तान के साउथ वजीरिस्तान जिले के वाना में सोमवार रात कैडेट कॉलेज पर आतंकियों ने हमला बोला. विस्फोटक से लदी गाड़ी से गेट तोड़ा गया और छह हमलावर अंदर घुसने की कोशिश में लगे.
सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई कर दो आतंकियों को मार गिराया, जबकि बाकी को घेर लिया गया. लगभग 650 छात्रों और स्टाफ मेंबर्स को सुरक्षित निकाला गया, बिना किसी हादसे के. सूचना मंत्री अता तारार ने कहा कि अगर समय पर कार्रवाई न हुई होती, तो यह 2014 के पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल हमले जैसी त्रासदी बन जाती, जिसमें 140 से ज्यादा ज्यादातर बच्चे मारे गए थे.
इन घटनाओं के साये में श्रीलंका की टीम पाकिस्तान में वनडे और टी20 ट्राई-सीरीज (जिम्बाब्वे के साथ) खेलने पहुंची है. रावलपिंडी में तीन वनडे 17 से 29 नवंबर तक होंगे. पीसीबी ने सेना और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर टीम की निगरानी सौंपी है. श्रीलंका के हाई कमिश्नर एडमिरल (रि.) फ्रेड सेनेविरत्ने ने भी नकवी से मुलाकात की और सुरक्षा व्यवस्था पर संतुष्टि जताई.
याद रहे, 2022 में न्यूजीलैंड ने इसी तरह सुरक्षा खुफिया जानकारी के आधार पर रावलपिंडी सीरीज रद्द कर दी थी, जो पाकिस्तानी क्रिकेट के लिए बड़ा झटका था. 2009 के लाहौर हमले के बाद तो दस साल तक कोई अंतरराष्ट्रीय टीम नहीं आई. अब पाकिस्तान इन दौरे को सफल बनाकर अपनी छवि सुधारना चाहता है.