कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर सामने आया है. चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया है. पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के बीच आयोग के इस फैसले से अब दोनों गुटों के सामने नई चुनावी पहचान का संकट खड़ा हो गया है. खास बात यह है कि आगामी बंगाल उपचुनाव में दोनों गुट टीएमसी के पुराने नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे.
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को निर्देश दिया है कि वे तय समयसीमा के भीतर आयोग को अपनी पसंद के नए नाम और चुनाव चिह्न बताएं. इसके बाद उपचुनाव के लिए दोनों पक्षों को अलग-अलग चुनावी पहचान दी जाएगी. यानी आने वाले उपचुनाव में मतदाताओं को मैदान में मौजूद दोनों गुटों के लिए नए नाम और नए सिंबल देखने को मिल सकते हैं.
ऐसा पहली बार नहीं है जब पार्टी में टूट के बाद चुनाव आयोग ने किसी बड़े राजनीतिक दल का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज किया हो, इससे पहले 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी यानी एलजेपी में चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस के बीच विवाद हुआ था. पार्टी के बंटवारे के बाद चुनाव आयोग ने एलजेपी का ‘बंगला’ चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया था. इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग चुनावी पहचान के साथ मैदान में उतरना पड़ा.
वहीं, 2022 में शिवसेना के भीतर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच पार्टी और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद हुआ था. उस समय चुनाव आयोग ने शिवसेना के पारंपरिक ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न को भी फ्रीज कर दिया था. बाद में दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए.
अब TMC के मामले में भी चुनाव आयोग के फैसले के बाद बंगाल उपचुनाव का सियासी मुकाबला नई चुनावी पहचान के साथ होने जा रहा है. दोनों गुटों की ओर से दिए गए नाम और सिंबल के विकल्पों पर आयोग के फैसले का इंतजार रहेगा.