नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के चर्चित उन्नाव दुष्कर्म मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया है और कई शर्तों के साथ उन्हें जमानत दे दी है. कोर्ट ने सेंगर को 15 लाख रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और इतनी ही राशि की तीन जमानतें जमा करने का निर्देश दिया है.
साथ ही, पीड़िता के दिल्ली स्थित घर से 5 किलोमीटर के दायरे में न आने, उन्हें या उनकी मां को धमकी न देने और अपील के दौरान दिल्ली में ही रहने जैसी सख्त शर्तें लगाई गई हैं. किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत रद्द हो जाएगी. हालांकि, सेंगर अभी जेल से बाहर नहीं आएंगे क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के संबंधित दूसरे मामले में उन्हें 10 साल की सजा हो रही है और उसमें जमानत नहीं मिली है. इस फैसले पर योगी सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने न्यायपालिका की सराहना की है.
उन्होंने कहा कि अदालत ने सही निर्णय लिया है, हालांकि थोड़ा विलंब से ही सही, लेकिन न्याय हुआ है और इस फैसले का स्वागत है. वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे पूरी तरह न्यायपालिका का मामला बताया और कहा कि कोर्ट अपने विवेक से फैसला लेती है. दूसरी ओर, विपक्ष ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. पीड़िता ने फैसले को अपने परिवार के लिए 'काल' बताया और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है.
पीड़िता राहुल गांधी से मिल चुकी हैं, जहां उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन मिला है. सीबीआई भी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी. यह मामला 2017 का है, जब सेंगर पर नाबालिग का अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगा था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सभी संबंधित मुकदमों की सुनवाई दिल्ली में स्थानांतरित की गई थी.