'राम ने यादव को मारा' के बाद 'राम ने शर्मा को मारा'... यूपी चुनाव आयोग बोला- 'शुक्र है किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा'

Amanat Ansari 26 Oct 2026 05:18 PM 1 Mins
'राम ने यादव को मारा' के बाद 'राम ने शर्मा को मारा'... यूपी चुनाव आयोग बोला- 'शुक्र है किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा'

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव की मतदाता सूची में अजीबोगरीब नामों को लेकर चल रहा विवाद और तेज हो गया है. पहले “राम ने यादव को मारा” नाम वायरल होने के बाद अब यूपी मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने खुद “राम ने शर्मा को मारा” जैसी प्रविष्टि का हवाला देते हुए एक ऐसा जवाब दिया है, जिस पर राजनीतिक दलों की तरफ से सवाल उठ रहे हैं.

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक्स पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को टैग करते हुए पूछा था कि राम ने यादव को ही क्यों मारा? सिंह, पाठक, शर्मा, राय या बिष्ट को क्यों नहीं? क्या आपका कंप्यूटर जातिवादी है? इसका जवाब देते हुए यूपी CEO के ऑफिशियल हैंडल से पोस्ट किया गया कि विधान परिषद की मतदाता सूची में राम ने शर्मा को मारा नाम भी मौजूद है.

पोस्ट में कहा गया कि कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं है. गलती स्वीकार है, लेकिन सौभाग्य से गलती होते समय भी जाति का भेदभाव नहीं हुआ. भगवान का शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, नहीं तो जातिवादी होने के साथ सांप्रदायिक होने का इल्जाम भी लगता.

कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए पूछा कि इस हैंडल को कौन चला रहा है? उन्होंने लिखा कि आयोग की विश्वसनीयता पर पहले से सवाल हैं और यह हैंडल बाकी भ्रम भी दूर कर रहा है. इसके जवाब में आयोग ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने संयत भाषा का प्रयोग करते हुए केवल तथ्यों तक सीमित रहने के निर्देश दे दिए हैं.

गलती कैसे हुई?

आयोग के अनुसार, ये गलतियां ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सॉफ्टवेयर की वजह से हुईं. सॉफ्टवेयर अंग्रेजी नामों को हिंदी में ट्रांसलिटरेट करने के बजाय कुछ मामलों में ट्रांसलेट कर देता था. मिसाल के तौर पर Ramhit Yadav अगर गलती से Ram hit Yadav टाइप हो जाए तो वह राम ने यादव को मारा बन जाता. कुल 14.81 लाख प्रविष्टियों में से करीब 158 में ऐसी असामान्य एंट्री मिलीं, जो 0.01% से भी कम हैं.

B.Com जैसी एंट्री मानवीय लापरवाही बताई गई है. आयोग ने जांच के आदेश दे दिए हैं और सुधार का काम जारी है.  यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. राजनीतिक दल मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग इसे तकनीकी और मानवीय गलती बता रहा है.

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