उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत गंगा नदी के संरक्षण और सफाई पर जोर दिय़ा गया था. इसको लेकर 5 परियोजनाएं बनाई गई थी. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की 56वीं कार्यकारी समिति की बैठक में इन 5 प्रसतावों को स्वीकार कर लिया गया और उत्तर प्रदेश में गंगा के संरक्षण के लिए 73.39 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं को मंजूर कर लिया गया.
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल की अध्यक्षता में ये बैठक हुई थी. इस बीच उन्होंने कहा कि स्वीकृत परियोजनाएं गंगा नदी के ईको-सिस्टम में सुधार के लिए काफी अहम हैं. क्योंकि इस प्रोजेक्ट के जरिए गंगा में प्रदूषण को कम करने का काम किया जाएगा.
काली नदी परियोजना को मंजूरी
उत्तर-प्रदेश में बुलंदशहर के गुलावठी में गंगा की सहायक पूर्वी काली नदी में बढ़ते प्रदूषण की रोक-थाम के लिए लाई गई इस परियोजना को भी मंजूरी मिल गई है. इस परियोजना से इंटरसेप्शन और डायवर्जन के साथ 10 MLD क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जाएंगे. इसकी कुल 50.98 करोड़ रुपए की लागत का खर्च आएगा.. जिसमें अगले 15 साल के लिए रखरखाव और प्रबंधन को शामिल किया गया है.
दूसरी स्मार्ट लैबोरेटरी फार क्लीन रिवर परियोजना
नमामि गंगे और IIT बीएचयू के बीच संस्थागत ढ़ांचे के तहत वाराणसी में स्मार्ट लैबोरेटरी फार क्लीन रिवर परियोजना को लेकर सचिवालय बनाया जाएगा. यह परियोजना छोटी नदियों की कायाकलप करेगी. इस तरह की परियोजना का सीधा उद्देश्य नदियों के जलस्त्रोतों की रक्षा करना, उनको उनके प्राकृतिक रूप में वापस लाना और पर्यावरणीय संतुलन को बहाल करना है.
लखनऊ की गोमती नदी
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के जरिए प्रकृति-आधारित समाधानों के लिए ऊपरी गोमती नदी बेसिन में निचली धाराओं और सहायक नदियों के कायाकल्प की योजना को भी मंजूरी दी गई. इस परियोजना की अनुमानित लागत 81.09 लाख रुपए है. यह परियोजना बहुत महत्वपूर्ण है. क्योंकि छोटी नदियां और धाराएं बड़ी नदियों के जल प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कारगार होगा.
छिवकी रेलवे स्टेशन का विकास
प्रयागराज के छिवकी रेलवे स्टेशन पर अर्थ गंगा केंद्र की स्थापना और स्टेशन की ब्रांडिंग की परियोजना को मंजूरी मिली. इस परियोजना की कुल लागत 1.80 करोड़ रुपए है, जिसमें से 68.70 लाख रुपए अगले पांच सालों तक इसके रखरखाव और प्रबंधन के लिए खर्च किए जाएंगे. इतना ही नहीं गंगा बेसिन के हर राज्य में अर्थ गंगा केंद्रों का निर्माण किया जाएगा, जिसका सीधा उद्देश्य महाकुंभ मेला और उसके बाद लोगों में गंगा और पर्यावरण को लेकर जागरूकता फैलाना है.
रायबरेली के डलमऊ में फीकल स्लज मैनेजमेंट परियोजना
नमामि गंगे परियोजना के जरिए रायबरेली के डलमऊ में गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए फीकल स्लज मैनेजमेंट परियोजना को मंजूरी दी गई है. इस परियोजना से 8 KLD क्षमता वाले प्लांट के साथ 15 किलोवाट के सोलर पॉवर प्लांट भी लगाए जाएंगे. यह परियोजना DBOT मॉडल पर आधारित है, जिसकी कुल लागत 4.40 करोड़ रुपए है. परियोजना की अवधि पांच साल तक की है.
बता दें कि महाकुंभ 2025 से पहले प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है. महाकुंभ से पहले गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने और उसके इको-सिस्टम को सुधारने के लिए परियोजनाओं का एक खाका तैयार किया था. यह परियोजनाएं गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने और उसके इको सिस्टम को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.