कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब उन मुद्दों पर कार्रवाई शुरू हो गई है, जिन्हें चुनाव के दौरान बीजेपी ने सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाया था. इन्हीं में से एक था कथित ‘भाईपो टैक्स’. नई सरकार के गठन के बाद हाईवे पर अवैध वसूली के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है. प्रशासन का दावा है कि राज्य के कई हिस्सों में वर्षों से चल रहे गैरकानूनी वसूली तंत्र को खत्म किया जा रहा है.
दरअसल, ‘भाईपो’ बांग्ला भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ ‘भतीजा’ होता है. विपक्षी दल लंबे समय से इस शब्द का इस्तेमाल पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के लिए करते रहे हैं. बीजेपी नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान आरोप लगाया था कि बंगाल में एक ऐसा सिंडिकेट काम कर रहा था, जहां बिना पैसे दिए ट्रांसपोर्ट और कारोबार से जुड़े काम आगे नहीं बढ़ते थे. इसी कथित वसूली नेटवर्क को विपक्ष ने ‘भाईपो टैक्स’ नाम दिया.
बताया जाता है कि बंगाल से गुजरने वाले राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर जगह-जगह अवैध चेकपोस्ट बनाए गए थे. यहां बांस के बैरिकेड लगाकर ट्रकों को रोका जाता था और कथित तौर पर वसूली की जाती थी. ट्रक ड्राइवरों का आरोप रहा कि पैसे नहीं देने पर बदसलूकी, धमकी और वाहनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं होती थीं. खासकर पुरुलिया और पश्चिम बर्धमान जैसे इलाकों में इस नेटवर्क का असर ज्यादा बताया जाता था.
अब नई सरकार ने इन अवैध नाकों को हटाने के आदेश दिए हैं. प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि हाईवे पर किसी भी तरह की गैरकानूनी वसूली दोबारा शुरू न होने पाए. इसके साथ ही कथित अवैध निर्माण और संपत्तियों को लेकर भी जांच तेज कर दी गई है. सरकार इसे कानून व्यवस्था सुधारने और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है.