नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को पाकिस्तान के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उसने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारत के छह लड़ाकू विमानों को मार गिराया. जनरल चौहान ने इस दावे को "पूरी तरह गलत" बताया. टीवी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि विमानों के गिराए जाने की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि वे क्यों गिराए गए और भारत ने अपनी गलतियों से क्या सीखा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सेना ने अपनी सामरिक गलतियों को जल्दी पहचाना, उन्हें सुधारा और दो दिन बाद फिर से लंबी दूरी के हमले किए.
ऑपरेशन सिंदूर में क्या हुआ?
ऑपरेशन सिंदूर मई की शुरुआत में चार दिन तक चला, जो भारत द्वारा पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों को नष्ट करने की कार्रवाई थी. यह कार्रवाई पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले के जवाब में शुरू की गई थी, जिसमें 25 पर्यटक मारे गए थे. भारत ने इस दौरान पाकिस्तान के नौ आतंकी शिविरों को नष्ट किया. जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन हमलों के जरिए भारतीय सैन्य ठिकानों और सीमावर्ती इलाकों को निशाना बनाया. इसके बाद भारत ने लंबी दूरी की ब्रह्मोस मिसाइलों से पाकिस्तान के 11 हवाई ठिकानों पर सटीक हमले किए. जनरल चौहान ने कहा कि कुछ नुकसान शुरुआती चरण में हुआ, लेकिन सेना ने तुरंत अपनी कमियों को समझा और उन्हें ठीक कर लिया.
सामरिक गलतियों को जल्दी सुधारा
जनरल चौहान ने बताया कि भारतीय सेना ने अपनी गलतियों को जल्दी पहचाना और उन्हें सुधारने के बाद 8 और 10 मई को फिर से हमले किए. इन हमलों में भारतीय विमानों ने 300 किलोमीटर अंदर तक पाकिस्तान के हवाई ठिकानों पर एक मीटर की सटीकता के साथ हमले किए. उन्होंने कहा कि यह भारत की सैन्य ताकत और तकनीकी क्षमता को दर्शाता है. जनरल ने यह भी स्पष्ट किया कि नुकसान की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि गलतियां क्यों हुईं और उन्हें कैसे ठीक किया गया.
परमाणु युद्ध की आशंका को खारिज किया
जनरल चौहान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध के कगार पर पहुंच गए थे. जनरल ने कहा कि यह दावा "अतिशयोक्तिपूर्ण" है. उन्होंने बताया कि पारंपरिक युद्ध और परमाणु युद्ध के बीच काफी अंतर है, और यह संघर्ष उस स्तर तक कभी नहीं पहुंचा. भारत और पाकिस्तान के बीच संचार के चैनल हमेशा खुले रहे, जिससे स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली. उन्होंने कहा कि युद्ध को बढ़ाने की सीढ़ी में कई छोटे चरण हैं, जिनका उपयोग मुद्दों को सुलझाने के लिए किया जा सकता है.
चीनी हथियारों की नाकामी
पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसके पास चीन और अन्य देशों से मिले हथियार बहुत प्रभावी हैं. जनरल चौहान ने इस दावे को भी खारिज करते हुए कहा कि ये हथियार "काम नहीं आए." उन्होंने बताया कि भारत ने पाकिस्तान के "भारी हवाई रक्षा" वाले हवाई ठिकानों पर सटीक हमले किए, जो चीनी हथियारों की नाकामी को दर्शाता है. भारतीय मिसाइलों और विमानों ने इन रक्षा प्रणालियों को आसानी से पार कर लिया और अपने लक्ष्यों को नष्ट किया.
युद्धविराम और भविष्य की रणनीति
जनरल चौहान ने कहा कि वर्तमान में युद्धविराम बना हुआ है और यह पाकिस्तान की भविष्य की कार्रवाइयों पर निर्भर करेगा. उन्होंने साफ किया कि भारत ने अपनी "रेड लाइन्स" स्पष्ट कर दी हैं. अगर पाकिस्तान इन सीमाओं का उल्लंघन करता है, तो भारत फिर से कड़ी कार्रवाई करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सेना हमेशा तैयार है और किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम है.
सीमा पार आतंकवाद से निपटने का सवाल
जनरल चौहान के साक्षात्कार के दौरान यह सवाल भी उठा कि सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए क्या मजबूत सुरक्षा उपाय बेहतर हैं या कूटनीतिक बातचीत? इस पर जनरल ने दोनों के महत्व को स्वीकार किया, लेकिन जोर दिया कि भारत ने अपनी सैन्य ताकत और रणनीति से आतंकवाद को करारा जवाब दिया है. ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने में सक्षम है.