नई दिल्ली: गोधरा कांड (Godara Case) तो आप सबको याद ही होगा, जो इतिहास के पन्नो में एक काला दाग है. गोधरा कांड एक तरह से देश की एकता और उनके दिल पर चोट करने वाला एक बड़ा हादसा माना जाता है. कैसे एक ट्रैन में आग ली और देखते ही देखते कई लोग उसकी चपेट में आ गए. पंद्रह साल पहले 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में 59 लोगों ने आग में जलकर अपनी जान गंवा दी थी.
ये सभी 'कारसेवक' थे, जो अयोध्या से वापस लौट रहे थे. गोधरा कांड को 15 साल बीत चुके हैं लेकिन आज भी इसकी चर्चा उसी दर्द के साथ होती है. यही नहीं किसे पता था कि गोदारा कांड एक दंगे का रूप भी लेगी, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी.
क्या है गोधरा कांड?
27 फरवरी की सुबह जैसे ही साबरमती एक्सप्रेस गोधरा रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, उसके एक कोच से अचानक से आग की लपटे उठने लगी थी. देखते ही देखते आग का गुबार निकलने लगा था. साबरमती ट्रेन के S-6 कोच के अंदर भीषण आग लगी थी. जिससे कोच में मौजूद यात्री उसकी चपेट में आ गए. इनमें से ज्यादातर वो कार सेवक थे, जो राम मंदिर आंदोलन के तहत अयोध्या में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे. आग बढ़ती गयी और 59 कार सेवकों ने अपनी जान गंवा दी. ऐसा बताया जाता है कि कुछ लोगों ने इसे बड़ा राजनीतिक रूप दे दिया और गुजरात के माथे पर कभी न मिटने वाला दाग लगा दिया..

हालांकि जिस वक़्त ये हादसा हुआ उस वक़्त गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) थे. इस घटना को एक साजिश के तौर पर देखा गया. इस घटना के बाद शाम में ही मोदी ने बैठक बुलाई. सवाल जवाब का सिलसिला शुरू हुआ. कई लोग सीएम की लापरवाही बता रहे थे और कुछ लोग इसे साजिश. बैठक को लेकर तमाम सवाल उठे. ट्रैन की आग को साजिश बताया गया.
एडीए रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रेन में भीड़ द्वारा पेट्रोल डालकर आग लगाने की बात गोधरा कांड की जांच कर रहे नानवती आयोग ने भी मानी. 27 फरवरी 2002 को बैठक हुई तो वहीं 28 फरवरी को गोधरा से कार सेवकों के शव अहमदाबाद लाए गए. शवों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया. किसे पता था कि 27 फरवरी को जिस ट्रैन में 59 लोग जल कर मरे वो घटना देखते ही देखते दंगो का रूप ले लेगी.
खबरों के मुताबिक इस केस में 1,500 लोगों के ऊपर FIR दर्ज की गई थी. कई सारे नाम सामने निकल कर आये थे. ट्रेन जलाने के मामले में गिरफ़्तार किए गए लोगों पर POTA भी लगाया गया. खबरों के मुताबिक एसआईटी की विशेष अदालत ने एक मार्च 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया था जबकि 63 को जमानत दी गयी थी. इनमें 11 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई जबकि 20 को उम्रकैद की सजा हुई.
विक्रांत मैसी की फिल्म साबरमती रिपोर्ट

आपको याद होगा हालही में एक्टर विक्रांत मेस्सी की साबरमती रिपोर्ट मूवी भी सामने आई थी जो गोधरा कांड पर बनी थी. इस फिल्म को भी लोगों ने खूब सराहा. यही नहीं हर राज्य के सीएम और पीएम मोदी ने खुद इस फिल्म को देखा और फिल्म के डायरेक्टर और एक्टर की सराहना की. विक्रांत मैसी कितने बढ़िया एक्टर हैं इस बात को उन्होंने पिछले कुछ सालों में अपनी अलग-अलग फिल्मों से साबित किया है.
फिल्म 'द साबरमती रिपोर्ट' में भी उनका काम अच्छा है. हालांकि 27 फरवरी की तारीख मरते दम तक कोई नहीं भूलेगा. गोधरा कांड आज भी गुजरात ही नहीं बल्कि देश की जनता के दिलों पर एक जख्म है जो हमेशा हर 27 फरवरी को याद किया जाएगा.