Pir Panjal dispute: पीर पंजाल विवाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इस सप्ताह काफी बड़ा हंगामा मचा चुका है. यह मुख्य रूप से बीजेपी के नेता और विपक्ष के नेता सुनील शर्मा के एक बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने पीर पंजाल क्षेत्र के अस्तित्व को ही नकार दिया.
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सुनील शर्मा ने हाल ही में एक न्यूज़ पोर्टल को दिए इंटरव्यू में पीर पंजाल क्षेत्र में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) की मांग पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें "पीर पंजाल" नाम किसी डिक्शनरी या आधिकारिक जगह में नहीं मिला और ऐसा कोई क्षेत्र जम्मू-कश्मीर में अस्तित्व में ही नहीं है. उन्होंने दावा किया कि यह इलाका पुराने समय में चंद्रभागा के नाम से जाना जाता था.
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इस बयान से राजौरी और पूंछ (पीर पंजाल क्षेत्र) के विधायकों में भारी गुस्सा फैल गया. उप-मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, वन मंत्री जावेद राणा, कांग्रेस विधायक इफ्तिखार अहमद, और अन्य (जैसे मुजफ्फर इकबाल खान) ने विधानसभा के अंदर और बाहर प्रदर्शन किए, नारे लगाए और सुनील शर्मा से सार्वजनिक माफी की मांग की.
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उन्होंने इसे क्षेत्र के लोगों की भावनाओं और पहचान का अपमान बताया. शर्मा ने माफी देने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि जम्मू-कश्मीर एक अविभाजित इकाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल क्षेत्रीय आधार पर राज्य को बांटने की साजिश कर रहे हैं, जैसे "ग्रेटर कश्मीर" की अवधारणा को बढ़ावा देकर. उन्होंने पुराने ग्रंथों (वेद, पुराण, राजतरंगिणी) का हवाला देते हुए कहा कि यह क्षेत्र चंद्रभागा (चेनाब नदी से) या पंचालदेव/पंजाल के नाम से जाना जाता था, लेकिन "पीर" (फारसी शब्द) का कोई ऐतिहासिक आधार नहीं है.
पीर पंजाल क्षेत्र क्या और कहां है?
पीर पंजाल पहाड़ी श्रृंखला है जो जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में है. यह मुख्य रूप से राजौरी और पूंछ जिलों को संदर्भित करता है, जो पाकिस्तान की LoC (लाइन ऑफ कंट्रोल) के बहुत करीब हैं. कभी-कभी चेनाब घाटी (डोडा, किश्तवाड़, रामबन) को भी इससे जोड़ा जाता है. यह क्षेत्र लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि जम्मू शहर और कश्मीर घाटी को विकास, सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य और फंडिंग में ज्यादा ध्यान मिलता है, जबकि पीर पंजाल को उपेक्षित रखा जाता है.
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साथ ही, यह इलाका पाकिस्तानी क्रॉस-बॉर्डर फायरिंग, घुसपैठ और आतंकवाद का सबसे ज्यादा शिकार रहा है. हाल ही में 2025 में ऑपरेशन सिंदूर (भारत की ओर से पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला) के दौरान पाकिस्तान की जवाबी गोलीबारी से पूंछ में कई घर तबाह हुए और कम से कम 16 लोग मारे गए. स्थानीय लोग कहते हैं कि उनके बलिदान और रोजाना की सुरक्षा की उपेक्षा हो रही है.
क्यों इतना भावुक मुद्दा बन गया?
यह विवाद अब सिर्फ नाम का नहीं रहा. यह क्षेत्रीय अस्मिता, विकास की उपेक्षा, सीमा पर बलिदान, और जम्मू-कश्मीर की एकता vs अलग पहचान के बड़े सवाल पर केंद्रित हो गया है. राजनीतिक तनाव बहुत बढ़ गया है, खासकर एनसी-कांग्रेस गठबंधन और बीजेपी के बीच.