Maha Kumbh stampede: महाकुंभ अभी 26 दिन और रहेगा, ऐसे में आगे बड़ी घटना न हो इसके लिए योगी सरकार ने 10 अधिकारियों को क्यों बुलाया? ये उन तीन रिटायर जज, IAS और IPS से अलग हैं, जिन्हें जांच की कमान दी गई है. जानकार बताते हैं 28-29 जनवरी की रात महाकुंभ में जैसी भीड़ उमड़ी, वैसी ही भीड़ वसंत पंचमी के दिन भी उमड़ सकती है, उस दिन भी शाही स्नान होना है.

ऐसे में उस दिन कोई घटना न हो इसके लिए मौजूदा अधिकारियों पर भरोसा करने के साथ-साथ योगी ने नए अधिकारियों की टीम भेजी है और इस बार हर किसी को एक अलग जिम्मेदारी दी गई है. जिसके बारे में इसलिए भी जानना जरूरी है, ताकि महाकुंभ में आप या आपका कोई अपना जा रहा हो, तो उसे कोई परेशानी न हो, और मन में कोई डर न बैठा रहे.

सोशल मीडिया के कुछ पोस्ट छोड़ दें तो महाकुंभ में सारी व्यवस्था सुचारू हो चुकी है. भगदड़ के कुछ घंटे बाद ही हालात काबू कर लिए गए थे और अब जो इंतजाम किए गए हैं, उसके मुताबिक वसंत पंचमी के दिन श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होगी. महाकुंभ का जिम्मा संभालने के लिए जिन अधिकारियों को भेजा गया है, उनमें पहले नंबर पर हैं आशीष गोयल, दूसरे नंबर पर भानु चंद गोस्वामी, इनके अलावा 5 विशेष स्तर के सचिव और हैं, जिन्हें बड़ी उम्मीदों के साथ प्रयागराज भेजा गया है और इन पर भरोसा क्यों जताया गया है, इसे समझने के लिए इनके बारे में जानना होगा.

कौन हैं वो 5 ऑफिसर, जिन्हें योगी ने भेजा प्रयागराज?
- आशीष गोयल: साल 1995 बैच के IAS ऑफिसर हैं. फिलहाल यूपी पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, साल 2019 में जब कुंभ हुआ तो ये प्रयागराज के कमिश्नर थे, सफल आयोजन करवाया था. ऑन द स्पॉट डिसीजन लेते हैं और न सिर्फ फीडबैक सही लेते हैं, बल्कि ऊपर भी फीडबैक सही पहुंचाते हैं.
- भानु चंद्र गोस्वामी: 2010 बैच के यूपी कैडर के IAS अधिकारी हैं, अभी राहत आयुक्त हैं. साल 2019 में कुंभ का सफल आयोजन करवाया, तब प्रयागराज के डीएम हुआ करते थे. जमीनी हालात को परखने में माहिर माने जाते हैं. महाकुंभ में ऐसे अधिकारियों की सख्त जरूरत है.
- प्रफुल्ल त्रिपाठी: साल 2015 बैच के PCS अफसर हैं. अभी चंदौली के एडीएम हैं. तहसीलदार से पदोन्नत होकर पीसीएस अफसर बने हैं. बतौर तहसीलदार उनका फील्ड में काम करने और भीड़ को नियंत्रित करने का अनुभव है.
- प्रतिपाल चौहान: 2014 बैच के PCS हैं. अभी बस्ती में एडीएम FR हैं. बदायूं, सुल्तानपुर, बाराबंकी, उन्नाव और संभल में डिप्टी कलेक्टर रहे हैं. आगरा में सिटी मजिस्ट्रेट रहे हैं. हालात को संभालने में माहिर हैं.
- आशुतोष दुबे: 2014 बैच के पीसीएस अफसर हैं. बाराबंकी, प्रतापगढ़ और मिर्जापुर में डिप्टी कलेक्टर रहे हैं. वर्तमान में कानपुर में एडीएम के पद पर तैनात हैं. भीड़ को नियंत्रित करना अच्छी तरह जानते हैं.
इनके अलावा विशेष सचिव स्तर के 5 अधिकारी भी भेजे गए हैं, खुद डीजीपी प्रशांत कुमार और मुख्य सचिव मनोज कुमार ने प्रयागराज में जाकर मीटिंग की है, हालात का जायजा लिया है, और उसके बाद इन अधिकारियों को वहां तैनात करने का फैसला लिया, इसके अलावा साल 2013 में कुंभ के दौरान डीआईजी रहे केपी सिंह ने योगी सरकार को 6 बड़े सुझाव भी दिए हैं.

केपी सिंह ने दिए ये सुझाव
- पहला- संगम घाट पर लोग स्नान करें, कपड़े बदलें और तुरंत जाए, घाट पर बैठे या सोएं नहीं
- दूसरा- पांटून पुलों का बेहतर मैनेजमेंट किया जाए. लंबे समय तक पुल बंद करने न रखे जाएं
- तीसरा- कुंभ क्षेत्र में सड़क के किनारे गाड़ियां ना खड़ी हों. अखाड़े के सीमित पास जारी हों
- चौथा- लोगों को समझाया जाए संगम क्षेत्र के 5 कोस में कहीं भी स्नान का बराबर महत्व है
- पांचवां- अखाड़ा मार्ग पर बैरीकेडिंग करते समय निकासी की व्यवस्था भी हो, जो इमरजेंसी में इस्तेमाल हो
- छठा- संगम क्षेत्र पर पहले काम कर चुके अधिकारियों को तैनात किया जाए, नए लोग उनके साथ हों
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