नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों ने हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. इस हाई-प्रोफाइल ब्रीफिंग में दो वरिष्ठ महिला अधिकारियों, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने हिस्सा लिया. कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' का उद्देश्य पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाना था. यह ऑपरेशन बुधवार को तड़के 1:05 बजे से 1:30 बजे के बीच किया गया. भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर हमला किया. ऑपरेशन के लिए नौ ठिकानों को चुना गया था, और सभी नौ हमले सफल रहे. बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 25 भारतीय नागरिकों और एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे.
कौन हैं कर्नल सोफिया कुरैशी?
कर्नल सोफिया कुरैशी गुजरात की रहने वाली हैं. उन्होंने बायोकेमिस्ट्री में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हासिल की है. उनके दादाजी भी भारतीय सेना में सेवारत थे. सोफिया की शादी मशीनीकृत इन्फैंट्री के एक अधिकारी से हुई है. वह भारतीय सेना के कोर ऑफ सिग्नल्स में एक अधिकारी हैं. साल 2016 में, कर्नल सोफिया कुरैशी ने इतिहास रचते हुए पहली महिला अधिकारी के रूप में आसियान प्लस बहुराष्ट्रीय फील्ड ट्रेनिंग अभ्यास, 'एक्सरसाइज फोर्स 18' में भारतीय सेना के प्रशिक्षण दल का नेतृत्व किया.
'एक्सरसाइज फोर्स 18' भारत द्वारा आयोजित सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अभ्यास था. इस अभ्यास में 18 देशों के दलों ने हिस्सा लिया, और कर्नल सोफिया कुरैशी एकमात्र महिला कमांडर थीं. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम की.
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में योगदान
कर्नल सोफिया कुरैशी ने छह साल तक संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (पीकेओ) में अपनी सेवाएं दी हैं. साल 2006 में, उन्होंने कांगो में संयुक्त राष्ट्र मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने अपने शांति मिशन के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उनकी जिम्मेदारियों में युद्धविराम की निगरानी करना और संघर्ष क्षेत्रों में मानवीय सहायता प्रदान करना शामिल था. उन्होंने इसे एक "गर्व का पल" बताया और अन्य महिला सैनिकों को देश के लिए कड़ी मेहनत करने और सभी को गर्व महसूस कराने के लिए प्रेरित किया.
ऑपरेशन सिंदूर: एक साहसिक कदम
'ऑपरेशन सिंदूर' भारतीय सेना की ताकत और आतंकवाद के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतीक है. कर्नल सोफिया कुरैशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस ऑपरेशन को बहुत सटीकता और गोपनीयता के साथ अंजाम दिया गया. आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए भारतीय सेना ने अत्याधुनिक तकनीक और रणनीति का इस्तेमाल किया. इस ऑपरेशन ने न केवल आतंकवादियों को कड़ा संदेश दिया बल्कि यह भी दिखाया कि भारतीय सेना अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती है.
महिला सशक्तिकरण का प्रतीक
कर्नल सोफिया कुरैशी की कहानी महिला सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल है. भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है, और सोफिया जैसी अधिकारी इस बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं. उन्होंने न केवल युद्ध के मैदान में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी काबिलियत साबित की है. उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, जो सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहती हैं.