नोएडा: एक तरफ मजदूरों का नोएडा में प्रदर्शन चल रहा है, जिन्हें समझाने के लिए अधिकारी मीटिंग कर रहे हैं, खुद उनके पास पहुंचकर बातचीत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ मुजफ्फरनगर से सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस प्रदर्शन के बीच बड़ा संदेश दिया है, उन्होंने साफ कहा है श्रमिकों के हकों पर डाका ड़ालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, ख़बर यहां तक है कि योगी आदित्यनाथ ने अगले 24 घंटे के भीतर शांति व्यवस्था स्थापित करने के आदेश दिए हैं, श्रमिकों का शोषण बंद हो और फैक्ट्री मालिकों को सुरक्षा मिले, इस बात को लेकर यगी सरकार पहले से ही नीतियां बना रही है, वरना सोचिए जिस यूपी में पहले लोग निवेश से डरते थे, वो यूपी आज कैसे निवेशकों के लिए पसंदीदा जगह बनती जा रही है..बावजूद उसके कुछ लोग अशांति फैलाने के लिए जब षडयंत्र रचते हैं तो बाबा का बुलडोजर उनके सामने आकर खड़ा हो जाता है, और इस मामले में भी अब तक तीन बड़े अपडेट आए है.
लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि आखिर नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के पीछे किसका हाथ है, आखिर यूपी के श्रम मंत्री अनिल राजभर, का विभाग उन कंपनियों पर पहले से नकेल नहीं कस पाया, जिसके खिलाफ ये सड़कों पर उतरे हैं, मदरसन कंपनी तो देश-दुनिया की जानी-मानी कंपनी है, और इसके अलावा भी करीब 9 कंपनियां ऐसी हैं, जिनके मजदूर अब अपना हक मांग रहे हैं...ये बात तो सच है कि 10-12 हजार महीना कमाने वाले मजदूरों की मुश्किलें इन दिनों बढ़ी हैं, क्योंकि गैस की कीमतें ईरान-इजरायल जंग की वजह से कई गुणा बढ़ चुकी हैं, घर के खर्चे हर किसी के बढ़े हैं, यहां तक कि कई मकान मालिकों ने किराया भी बढ़ा दिया है, पर जो मजदूर कंपनियों में काम करते हैं उनकी सैलरी अब तक नहीं बढ़ी. जिसे लेकर वो सड़कों पर हैं...जानकार कहते हैं हरियाणा सरकार का एक सही फैसला नोएडा में मजदूरों के आंदोलन के लिए चिंगारी बन गया.
इससे पहले केन्द्र सरकार ने भी 1 अप्रैल से देशभर में मजदूरों के लिए 783 रुपये रोजाना की सैलरी तय करने का फैसला लिया था, और यूपी सरकार भी मजदूरों को लेकर बड़ा फैसला ले रही थी, लेकिन उसी बीच कुछ लोगों ने आंदोलन की चिंगारी भड़का दी, जिसे संभालने में पुलिस-प्रशासन से लेकर श्रम विभाग के अधिकारियों तक के हाथ-पांव फूल गए..लेकिन अब योगी सरकार ने ये ऐलान कर बता दिया है कि श्रमिकों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.