ईरान के हमलों से 13 अमेरिकी बेस रहने लायक नहीं, कहां गए 50 हजार सैनिक?

Amanat Ansari 26 Mar 2026 10:34: PM 3 Mins
ईरान के हमलों से 13 अमेरिकी बेस रहने लायक नहीं, कहां गए 50 हजार सैनिक?

न्यूयॉर्क: ईरान के हमलों से मध्य पूर्व में स्थित कम से कम 13 अमेरिकी सैन्य बेस पूरी तरह से रहने लायक नहीं रह गए हैं, जिससे अमेरिकी सैनिकों को अपने मजबूत ठिकानों को छोड़कर होटलों और ऑफिस स्पेस में शिफ्ट होना पड़ा है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अब युद्ध का स्वरूप पूरी तरह से रिमोट वार बन गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने मध्य पूर्व भर में अमेरिकी बेस पर बमबारी की है, जिससे कई अमेरिकी सैनिकों को पूरे इलाके में होटलों और ऑफिस स्पेस में स्थानांतरित होना पड़ा है. मुख्य बेस क्षतिग्रस्त या असुरक्षित हो जाने के कारण, हजारों अमेरिकी सैनिक अब पूरे क्षेत्र में बिखरे हुए हैं. कुछ को तो यूरोप तक भेज दिया गया है, जबकि बाकी मध्य पूर्व में ही हैं लेकिन अब अपने मूल बेस से नहीं संचालित हो रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब जमीनी सैन्य बल का बड़ा हिस्सा, मूल रूप से युद्ध लड़ते हुए Remotely' काम कर रहा है. इन व्यवधानों के बावजूद, पेंटागन का कहना है कि ऑपरेशन्स तेजी से चल रहे हैं. रक्षा सचिव Pete Hegseth ने कहा कि अमेरिका ने ईरानी लक्ष्यों पर 7,000 से अधिक हमले कर दिए हैं. उन्होंने जोड़ा कि अब तक हमने ईरान और उसके सैन्य बुनियादी ढांचे पर 7,000 से ज्यादा टारगेट्स को निशाना बनाया है.

मध्य पूर्व में क्षतिग्रस्त प्रमुख अमेरिकी बेस

क्षति कई महत्वपूर्ण अमेरिकी ठिकानों तक फैली हुई है. कुवैत में Port Shuaiba, Ali Al Salem Air Base और Camp Buehring पर भारी हमले हुए. Port Shuaiba पर हुए हमले में आर्मी का टैक्टिकल ऑपरेशन्स सेंटर पूरी तरह नष्ट हो गया और छह अमेरिकी सैनिक मारे गए.

ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों ने कतर के Al Udeid Air Base को भी निशाना बनाया, जिसमें एक महत्वपूर्ण रडार सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया. बहरीन में, US Fifth Fleet मुख्यालय पर एक वन-वे अटैक ड्रोन से कम्युनिकेशन उपकरण नष्ट हो गया. सऊदी अरब के Prince Sultan Air Base पर हमलों में रिफ्यूलिंग टैंकर और कम्युनिकेशन सिस्टम क्षतिग्रस्त हुए, जिससे ऑपरेशन्स और बाधित हुए.

ऑपरेशनल क्षमता पर चिंता
रिटायर्ड एयर फोर्स टारगेटिंग स्पेशलिस्ट मास्टर सर्जेंट Wes J. Bryant ने कहा कि वैकल्पिक स्थानों पर हुए इन हमलों ने सैन्य हलकों में ऑपरेशनल प्रभावशीलता को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है. उन्होंने कहा कि हां, हम जल्दी से ऑपरेशन सेंटर्स स्थापित कर सकते हैं, लेकिन इसमें आपकी क्षमता जरूर कम हो जाएगी, आप सारा उपकरण होटल की छत पर नहीं लगा सकते. अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सैनिक होटल की छतों से ऑपरेट नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने ऐसे बिखरे हुए सेटअप की सीमाओं को स्वीकार किया.

ईरान ने नागरिकों को चेतावनी दी, लक्ष्य बढ़ाए

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने क्षेत्र के नागरिकों से अपील की है कि वे अमेरिकी सैनिकों के नए स्थान बताएं. इससे अब सुरक्षित कंपाउंड्स के बाहर रह रहे सैनिकों की सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है. ईरानी मीडिया के जरिए प्रसारित संदेशों में IRGC ने निवासियों को अमेरिकी बलों को शरण न देने की चेतावनी दी और उनसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए सैनिकों की लोकेशन शेयर करने को कहा.

ईरान ने अब सिर्फ सैन्य लक्ष्यों तक ही सीमित नहीं रखा है, बल्कि दूतावासों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर भी हमले किए हैं और पूरे क्षेत्र में ड्रोनों तथा मिसाइलों की लहरें दागी हैं. इससे वैश्विक शिपिंग भी प्रभावित हुई है, खासकर होर्मुज की खाड़ी प्रभावित हुई है.

इस स्थिति ने इस सवाल को जन्म दिया है कि क्या वाशिंगटन ईरान की प्रतिक्रिया के लिए पर्याप्त रूप से तैयार था. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने संघर्ष बढ़ने से पहले क्षेत्र में न तो कूटनीतिक और न ही सैन्य कर्मियों की संख्या काफी कम की थी. न ही अमेरिकियों को क्षेत्र में यात्रा न करने की समय पर चेतावनी दी गई थी.

अधिकारियों का कहना है कि इराक, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब और कतर में दशकों से किया गया अमेरिकी सैन्य निर्माण, जो कभी रणनीतिक गहराई माना जाता था. अब ईरान की मिसाइल क्षमता के कारण कमजोरियों में बदल गया है.

लगातार अमेरिकी हवाई हमलों के बावजूद, ईरान में जवाबी हमला करने की क्षमता बरकरार है. जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल Dan Caine ने कहा कि क्षेत्र भर में लेयर्ड डिफेंस अमेरिकी बलों की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अतिरिक्त उपाय करने की बात भी स्वीकार की.

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