नई दिल्ली: पंजाब के मलेरकोटला में 15 मई 2025 को एक सनसनीखेज जासूसी मामले का खुलासा हुआ, जिसमें पाकिस्तानी उच्चायोग के एक कर्मचारी से जुड़े वीजा रैकेट, हनी ट्रैप, और मनी ट्रेल का भंडाफाश हुआ। पंजाब पुलिस ने दो व्यक्तियों, गुजाला (31) और यामीन मोहम्मद, को मलेरकोटला से गिरफ्तार किया, जो भारतीय सेना की गतिविधियों से संबंधित संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान-आधारित हैंडलर को लीक कर रहे थे। इस मामले ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर हाल के तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
पुलिस के अनुसार, यह ऑपरेशन विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू हुआ। गुजाला ने फरवरी 2025 में दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग में वीजा के लिए आवेदन किया था, जहां उसकी मुलाकात उच्चायोग के कर्मचारी दानिश से हुई। दानिश ने गुजाला को हनी ट्रैप के जरिए अपने जाल में फंसाया और उसे सेना की गतिविधियों की जानकारी देने के लिए उकसाया। गुजाला ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए दानिश को गोपनीय जानकारी भेजी। उसकी पूछताछ के बाद यामीन को भी गिरफ्तार किया गया, जो इस जासूसी नेटवर्क का हिस्सा था। पुलिस ने दोनों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
जांच में पता चला कि आरोपियों को ऑनलाइन लेनदेन के जरिए भुगतान किया जा रहा था। गुजाला को दानिश से दो यूपीआई लेनदेन में 30,000 रुपये मिले थे। यामीन 2018 और 2022 में पाकिस्तान जा चुका था, इन्हीं कड़ियों को जोड़ कर पुलिस इसके पुराने कारनामों को खोलने में जुटी हुई है. दानिश, जो उच्चायोग के वीजा विभाग में तैनात था, उसने संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए भारत में कई स्रोत विकसित किए। 14 मई को भारत सरकार ने दानिश को "पर्सोना नॉन ग्राटा" घोषित कर देश छोड़ने का आदेश दिया।
पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि यह गिरफ्तारी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मलेरकोटला पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 152 और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धाराओं 3, 4, और 5 के तहत मामला दर्ज किया है। इस घटना ने भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया युद्धविराम समझौते के बाद भी खुफिया गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। पुलिस अब अन्य संदिग्धों और मनी ट्रेल की जांच कर रही है।