8th pay Commission: बजट से पहले ही केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे दिया है. दरअसल, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन और पेंशनभोगियों के भत्तों में संशोधन के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 8वें वेतन आयोग के गठन का फैसला लिया गया. मंत्री ने यह भी बताया कि आयोग के अध्यक्ष और दो सदस्यों की नियुक्ति जल्द ही की जाएगी.
केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के वेतन ढांचे में संशोधन के लिए हर दशक में एक बार वेतन आयोग का गठन करती है. वेतन ढांचे में संशोधन के अलावा, प्रत्येक वेतन आयोग के पास एक टर्म ऑफ रेफरेंस (टीओआर) होता है, जो मोटे तौर पर उसके फोकस को परिभाषित करता है. वेतन आयोग पेंशन भुगतान भी तय करता है. 7वें वेतन आयोग की स्थापना 2016 में की गई थी और इसका कार्यकाल 2026 में समाप्त होगा.
वेतन आयोग के अंतर्गत कौन आते हैं?
सातवें वेतन आयोग के अनुसार, केंद्र सरकार के कर्मचारी वे सभी लोग हैं जो केंद्र सरकार की सिविल सेवाओं में हैं और जिन्हें भारत के समेकित कोष से वेतन दिया जाता है, जो वह खाता है जिसमें सरकार अपना राजस्व एकत्र करती है. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) और स्वायत्त निकायों के कर्मचारी और ग्रामीण डाक सेवक सातवें वेतन आयोग के दायरे में नहीं आते हैं. इसका मतलब यह होगा कि कोल इंडिया में काम करने वाले किसी व्यक्ति को इसके दायरे में नहीं लाया जाएगा. पीएसयू कर्मचारियों के पास अलग-अलग वेतनमान होते हैं जो उनके द्वारा काम किए जाने वाले उपक्रम पर निर्भर करते हैं.
सातवें वेतन आयोग में क्या बदलाव हुए?
सातवें वेतन आयोग के लिए वेतन संशोधन की बात आने पर कर्मचारी यूनियनों ने 3.68 फिटमेंट फैक्टर की मांग की, लेकिन सरकार ने 2.57 के फिटमेंट फैक्टर पर फैसला किया. फिटमेंट फैक्टर एक गुणक है जिसका उपयोग वेतन और पेंशन की गणना के लिए किया जाता है.