ओवैसी मांगें मायावती का साथ, यूपी में दलित-मुस्लिम समीकरण के सहारे सत्ता की चाह! PDA पर क्या पड़ेगा असर?

Global Bharat 14 Jun 2026 01:31: PM 3 Mins
ओवैसी मांगें मायावती का साथ, यूपी में दलित-मुस्लिम समीकरण के सहारे सत्ता की चाह! PDA पर क्या पड़ेगा असर?

लखनऊ : असदुद्दीन ओवैसी यूपी में बिहार की कहानी दोहराना चाहते हैं. राहुल गांधी बिहार और बंगाल के सदमे से निकलना चाहते हैं. यूपी चुनाव सिर पर है. सबको मजबूत साथी की तलाश है. प्रदेश में दो लड़कों की जोड़ी टूट सकती है. कांग्रेस अपने नए साथी की तलाश में है. इसी बीच सबकी नजर टिकी है बसपा सुप्रीमो मायवती पर. क्योंकि मायावती एक बार फिर से पूरी ताकत के साथ यूपी चुनाव में उतरने का ऐलान कर चुकी हैं, उनका दलित वोट बैंक एकदम फिक्स है. 2007 में भी मायावती ने अपने कोर वोट बैंक और ब्राह्मणों को साध कर सत्ता हासिल की थी. हालांकि, बाद में उन्होंने मुस्लिम-दलित गठजोड़ की कोशिश की जिसका नतीजा शून्य निकला. 

2012 में जो सरकार हाथ से फिसली अब तक वो वापसी नहीं कर सकीं. एक समय ऐसा भी आया कि मायावती राजनीति के हाशिये तक पहुंच गईं. लोगों ने कहा कि बसपा का समय खत्म हो गया है, लेकिन अब फिर से मायावती वही पुराने अंदाज में नजर आ रही हैं. यही वजह है कि बड़े-बड़े दिग्गज चाहतें यूपी चुनाव में मायावती उनके साथ लड़ें, लेकिन मायावती खुद किसी के साभी साथ गठबंधन करने से इनकार कर चुकी हैं, क्योंकि यूपी चुनाव हर मायनों में सभी पार्टियों के लिए 2029 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है.

ओवैसी बिहार की तरह यूपी में भी सीट जीतना चाहते हैं
ओवैसी की नजर मुस्लिम, दलित और पिछड़ों के वोट पर है
मायावती एक ताकतवर साथी की भूमिका निभा सकती हैं
कांग्रेस भी यूपी में एक अच्छे साथी की तलाश में है
कांग्रेस का मकसद भी मायावती के साथ मिलकर दलित, पिछड़ों और मुस्लिमों का वोट हासिल करना है.
यूपी में मुस्लिमों को सपा का कोर वोटर माना जाता है
अखिलेश यादव ने 2024 में 37 सीटें जीत इतिहास रचा था. अखिलेश किसी भी हाल में मुस्लिम वोट को नहीं खोना चाहते. 

बिहार में लगातार दो बार 5 सीटें जीत कर ओवैसी का जोश हाई है. यूपी चुनाव की तैयारियों में AIMIM जुट चुकी है. खुद ओवैसी 14 जून को यूपी में रैली करने वाले हैं. ये रैली बहराइच के मटेरा विधानसभा क्षेत्र में होगी. यूपी AIMIM अध्यक्ष शौकत अली लोगों के घर-घर जाकर संपर्क अभियान चला रहे हैं. मटेरा से ही वो इस बार चुनाव लड़ सकते हैं. इस सीट पर ओवैसी की भव्य रैली कराकर पार्टी की ताकत दिखाने की तैयारी है. पूरे इलाके के मुस्लिम वोटर्स को एक करने और दलितों वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश इसी रैली से होगी. इसी रैली में शौकत अली की उम्मीदवारी का ऐलान भी किया जा सकता है.

2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 38 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन 37 सीटों पर जमानत जब्त हुई. 2022 में 95 सीटों में से 19 पर हिन्दू उम्मीदवार उतारने पड़े, जिसमें ज्यादातर पिछड़े समाज से आते थे और अब इसी फॉर्मूले पर काम करते हुए AIMIM 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, जहां सबसे ज्यादा फोकस मुस्लिम-दलित गठजोड़ पर है. AIMIM पश्चिमी यूपी के साथ-साथ अवध के कुछ पकड़ बनाने की कोशिश में है.
जिसमें बहराइच, बलरामपुर और बस्ती पर बिहार के सीमांचल की तरह खास फोकस है.

 दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी भी यूपी में इसी मॉडल पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. कई बार दावा किया गया है कि कांग्रेस ने बसपा को गठबंधन के लिए अप्रोच किया है. लेकिन मायावती ने पहले ही किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाओं से इनकार कर दिया है. इन सभी पार्टियों के समीकरण सपा के PDA फॉर्मूले को नुकसान पहुंचा सकते हैं. क्योंकि अखिलेश यादव लंबे समय से पिछड़ा-दलित और अल्पसंख्यकों पर फोकस हैं... वो किसी भी हाल में अपने कोर मुस्लिम वोट को नहीं छोड़ना चाहते... ऐसे में देखना अब ये होगा कि यूपी का हाथी किस करवट बैठने वाला है.

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