लखनऊ : यूपी चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है. सभी पार्टियां जीत की पूरी तैयारी में जुटी हुई हैं. एक तरफ बीजेपी है जो सीएम योगी के नाम पर बड़ी जीत का दावा कर रही है. योगी सरकार को चुस्त दुरुस्त कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस के नाम पर जीत की कोशिश में है. सीएम योगी आदित्यनाथ कट्टर हिन्दुत्व की राजनीति कर रहे हैं. दूसरी तरफ 10 साल से सत्ता के सूखे से जूझ रही समाजवादी पार्टी है, जिसके मुखिया हैं अखिलेश यादव, जो लगातार यूपी सरकार पर हमलावर हैं.
वो सरकार के कामकाज में ही कमियां नहीं निकालते, बल्कि तानाशाही का भी आरोप लगाते हैं. मुस्लिमों के नेता की पहचान बना बैठे अखिलेश भगवान राम का नाम ले रहे हैं. जिन अखिलेश यादव पर सनातन का विरोध करने का आरोप लगता था, वो खुद सनातनी होते जा रहे हैं और इस बार तो अखिलेश यादव ने दावा किया है अगर यूपी में इस बार भी बीजेपी जीत गई तो ये देश का आखिरी चुनाव होगा.
लोगों का दावा है कि अखिलेश के ऐलान से मैसेज दे रहे हैं. कि यूपी चुनाव जीतने के बाद बीजेपी तानाशाही लागू कर देगी. चीन की तरह यहां भी एक ही पार्टी का शासन लागू होगा तो वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है. योगी सरकार जानबूझ कर PDA के लोगों को निशाना बना रही है. समाजवादी पार्टी के नेताओं की जान को खतरा है. सिर्फ इतान ही नहीं अखिलेश यादव यहां भगवान श्री राम का भी जिक्र करते हैं. वो कहते हैं कि बीजेपी के लोगों ने चंदे और दान में गड़बड़ी की है. ये बात खुद भगवान राम देख रहे हैं.
अखिलेश यादव पर जिन पर सनातन की उपेक्षा और सनातनियों के अपमान के आरोप लगते थे. इनके पिता मुलायम सिंह यादव को तो मुल्ला मुलायम तक कह दिया गया था. ऐसे में अब अखिलेश यादव का बार-बार भगवान राम का जिक्र करना उनके मन की आवाज है या फिर सीएम योगी की कट्टर हिन्दुत्व वाली राजनीति का तोड़ ये चर्चा का विषय है, क्योंकि आज के समय में योगी आदित्यनाथ को ब्रांड हिन्दुत्व का सबसे बड़ा नेता माना जाता है और यूपी में लगातार दो बार कमल खिला चुके योगी तीसरी बार जीत का दावा कर रहे हैं.