Amit Shah Masterplan: सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बनाया ऐसा मास्टरप्लान, हर हिंदुस्तानी बनेगा लखपति, गांव-गांव तक खुलेगा बड़ा सेंटर

Abhishek Chaturvedi 11 Jul 2025 07:21: PM 4 Mins
Amit Shah Masterplan: सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बनाया ऐसा मास्टरप्लान, हर हिंदुस्तानी बनेगा लखपति, गांव-गांव तक खुलेगा बड़ा सेंटर
  • PM मोदी ने नया मंत्रालय खोला, शाह ने कुर्सी संभाली, 48 महीने में लॉन्च की 8 ऐसी योजनाएं, हर हिंदुस्तानी बनेगा लखपति!
  • नेशनल को-ऑपरेटिव पॉलिसी होगी लॉन्च, सहकारिता टैक्सी से सफर होगा सस्ता, ड्राइवर को मिलेगा मुनाफे का बड़ा हिस्सा!
  • सहकार से समृद्धि का नारा, भारत कैसे बनेगा 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, शाह ने बना दिया सबसे बड़ा मास्टरप्लान

Amit Shah Masterplan: तारीख थी 6 जुलाई 2021, हिंदुस्तान में एक नए मंत्रालय का गठन होता है, जिसकी कमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमित शाह के हाथों में होता है, और अगले 48 महीने सहकारिता मंत्री अमित शाह इसे नई ऊंचाईयों पर पहुंचा देते हैं, और अब जो मास्टरप्लान इस विभाग के लिए शाह ने बनाया है, उससे देश को बहुत बड़ा फायदा मिलने जा रहा है, इसके तीन बड़े प्लान पहले सुनिए, फिर बताते हैं जिस विभाग का नाम ज्यादातर लोग नहीं जानते थे, उस विभाग की पहुंच शाह ने गांव-गांव तक बना दी है. और नारा दिया है सहकार से समृद्धि का.

भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के 3 बड़े प्लान

  1. प्लान नंबर 1- मोदी सरकार नेशनल को-ऑपरेटिव पॉलिसी लॉन्च करने वाली है, जो देशभर में भारी संख्या में रोजगार पैदा करेगी, फरवरी 2026 तक 2 लाख PACS बनाने का लक्ष्य रखा गया है, अगले 5 साल में हर गांव में इसकी स्थापना होगी. 2025 से 2045 तक प्रभावी होगी.
  2. प्लान नंबर 2- सहकारिता मंत्रालय को-ऑपरेटिव टैक्सी का भी प्लान बना रहा है, जिसके तहत उबर, ओला की तरह कैब सुविधा मिलेगा, ड्राइवर्स को-ऑपरेटिव मेंबर होंगे. किराये में पारदर्शिता होगी, साथ ही मुनाफा भी निष्पक्ष तौर पर बांटा जाएगा.
  3. प्लान नंबर 3- को-ऑपरेटिव इंश्योरेंस कंपनी खोले जाने को लेकर भी विचार जारी है, ताकि देश की सबसे बड़ी को-ऑपरेटिव इंश्योरेंस कंपनी बनाई जा सके, इसके सदस्यों को फायदा मिले.

खुद शाह ये कहते हैं कि पीएम मोदी के विजन सहकार से समृद्धि का योगदान भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने में बड़ा होने वाला है. क्योंकि अब पूरी तरह से सिस्टम बदल चुका है. जहां को-ऑपरेटिव के प्रबंधन के लिए कई मंत्रालय थे, तो वहीं मोदी सरकार ने एक अलग मंत्रालय बनाया, पहले जहां PACS में मैनुअल रिकॉर्ड रखे जाते थे, अब इन सबको कंप्यूटराइज्ड कर दिया गया है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके. पहले PACS का मतलब जहां कर्ज और कृषि से जुड़ा था तो वहीं मॉडल बॉयलॉज के बाद इसमें 25 तरह की गतिविधियां शामिल की है, जिसमें स्टोरेज, इंश्योरेंस, मार्केटिंग सबकुछ है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को अब इस सेक्टर से जोड़ा रहा, जहां इनकी संख्या पहले न के बराबर हुआ करती थी.

  • मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटीज (संशोधन) एक्ट 2023 और मॉडल बॉयलॉज ने इस सेक्टर की प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूत किया है.
  • 67,930 PACS यानि प्राइमरी एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव सोसायटी को डिजिटलाइज करने के लिए 2516 करोड़ का फंड जारी किया गया है, जिसमें से 43 हजार 658 ऑपरेशनल यानि चालू हैं.
  • 10 हजार से ज्यादा मल्टीपल PACS स्थापित सरकार स्थापित कर रही है, जिससे डेयरी और मछली पालन सेक्टर से जुड़े लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा. दिसंबर 2024 में केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने इनका उद्घाटन किया.
  • को-ऑपरेटिव सेक्टर से जुड़े प्रोडक्ट के विदेशों में एक्सपोर्ट को लेकर भी सरकार प्लान तैयार कर रही है, ताकि निर्यात से होने वाले फायदे का 50 फीसदी किसानों को मिल सके, उनकी आय़ बढ़ सके.
  • NCEL यानि नेशनल को-ऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड को 2 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट का लक्ष्य दिया गया है. ताकि भारत की अर्थव्यवस्था में सहकारिता के योगदान को बढ़ाया जा सके

इतना ही नहीं मोदी सरकार ने सहकारिता आंदोलन के सबसे बड़े नेता त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल के सम्मान में त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी खोली गई है. करीब 125 एकड़ में फैली इस यूनिवर्सिटी में 20 से 25 लाख लोगों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य है. ताकि देशभर में सहकारिता की जड़ें मजबूत हो सके.

  • सीड्स को-ऑपरेटिव के तहत छोटे किसान जिनके पास ढाई एकड़ तक की जमीन है उन्हें सीड्स यानि बीज उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है
  • केन्द्रीय कैबिनेट ने दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना को मंजूरी दी है. पीएम मोदी ने 11 राज्यों में 11 PACS गोदाम का उद्घाटन किया है
  • NCDC की ओर से साल 2021 में जहां 25 हजार करोड़ लोन बांटे गए थे, तो वहीं 2024 में ये आंकड़ा 1.28 लाख करोड़ पहुंच गया, ताकि सहकारिता क्षेत्र का विकास हो
  • नेचुरल फार्मिंग को लेकर भी मोदी सरकार लगातार काम कर रही है, ताकि मिट्टी की उर्वर्ता बनी रहे, केमिकल फ्री खेती हो, और किसानों की आय बढ़ सके
  • आनंद पैटर्न पूरे भारत की डेयरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बनी है. गांव-गांव तक इसका नेटवर्क फैला है. भारत के 80 फीसदी दुग्ध उत्पादकों तक इनकी पहुंच है.

यानि एक-एक हर राज्य की सूरत बदल रही है. को-ऑपरेटिव की कमाई से 1.15 करोड़ लखपति दीदी की तकदीर बदली है. ब्याजमुक्त क्रेडिट कार्ड ने महिला उद्यमियों और छोटे किसानों को बड़ी राहत दी है.

  • देशभर के करीब 1 लाख PACS का नेतृत्व महिलाओं के हाथ में देकर महिला सशक्तिकऱण को मजबूत किया जा रहा है. करीब 1.56 करोड़ महिलाओं को 6426 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
  • गुजरात के पंचमहल और बनासकांठा के 4 लाख खातों में 500 करोड़ जमा हुए, देशभर में करीब 9 लाख बैंक खाते खुले, को-ऑपरेटिव बैंकों में 4 हजार करोड़ रुपये ज्यादा पैसे जमा हुए
  • मध्य प्रदेश जो देश के कुल जरूरतों का 9 फीसदी दूध की आपूर्ति करता है, जहां से 5.5 करोड़ लीटर दूध सप्लाई होता है, वहां का सिस्टम 100 फीसदी कंप्यूटराइज्ड हो चुका है.

आने वाले दिनों में सहकारिता मंत्रालय एक नया इतिहास लिखने को तैयार है, जिसमें देश के पहले सहकारिता मंत्री अमित शाह का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा, क्योंकि पहली बार मंत्रालय बनने के बाद तमाम चुनौतियों से गुजरते हुए शाह ने अद्भूत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय काम किया है.

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