बुधवार 18 सितंबर को नरेंद्र मोदी सरकार ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने, शहरी निकाय और पंचायत चुनाव 100 दिनों के भीतर कराने का प्रस्ताव है. केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव पर कांग्रेस ने साफ तौर पर कहा कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए चुनाव जहां और जब जरूरी हो, वहीं होने चाहिए. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (एक राष्ट्र, एक चुनाव) के विचार का विरोध करते हुए कहा कि, यह लोकतंत्र के अनुकूल नहीं है. खड़गे ने कहा कि, लोकतंत्र में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का कोई स्थान नहीं हो सकता. खड़गे केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को अपनाने के फैसले के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे.
इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "हम इसका समर्थन नहीं कर सकते. लोकतंत्र में चुनाव जरूरी हैं और जब जहां चुनाव आवश्यक हो, उन्हें वहां कराया जाना चाहिए. अगर हमें अपने लोकतंत्र को जीवित रखना है, तो यह तरीका काम नहीं करेगा." वन नेशन वन इलेक्शन पर विरोध व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी इस योजना को अव्यावहारिक बताया. वेणुगोपाल ने कहा, "यह इस देश में संभव नहीं है. वे वर्तमान मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं."
आपको बता दें, केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खड़गे की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष पर इस मुद्दे पर आंतरिक दबाव बनने लगेगा. वैष्णव ने कहा, "परामर्श प्रक्रिया में 80% से अधिक लोगों ने इसका समर्थन किया है, खासकर युवा वर्ग ने इसे लेकर उत्साह दिखाया है. ऐसे में विपक्ष पर दबाव आ सकता है."
गौरतलब है कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को लेकर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर रहे थे. इस समिति ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. यह रिपोर्ट 18,626 पन्नों की है और इसे तैयार करने में 191 दिनों का समय लगा. सरकार ने इस समिति का गठन 2 सितंबर, 2023 को किया था.
वन नेशन, वन इलेक्शन पर कांग्रेस का मानना है कि लोकतंत्र में चुनाव लोगों की भागीदारी का एक अहम जरिया हैं और उन्हें तय समय पर कराया जाना चाहिए. 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का विचार लोकतंत्र को कमजोर कर सकता है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय और स्थानीय मुद्दे दब सकते हैं. इसके अलावा, इस योजना को लागू करना भी व्यावहारिक रूप से बहुत मुश्किल होगा.