एक प्रशासक और शासक के बीच का रिश्ता कैसा होता है, एक जनप्रतिनिधि और एक IAS के बीच अच्छा रिश्ता क्या कहा जाएगा? इस बात को समझने के लिए आपको सौम्या झा और नरेश मीणा के बीच हुए विवाद की कहानी को थोड़ा अलग नज़रिए से समझना होगा! सौम्या झा एक IAS हैं जो अभी टोंक की कलेक्टर हैं,
UP में जिसे DM यानि जिला अधिकारी कहा जाता है. कलेक्टर सौम्या झा की तुलना IAS टीना डाबी से भी की जा रही है और ऐसा कहा जा रहा है कि दोनों के आपस में रिश्ते भी बहुत अच्छे हैं और फिलहाल इनके चर्चे है! सूत्र कहते हैं कि सौम्या झा के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा हैं
साथ ही वो ताकतवर IAS लॉबी भी है जो राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी चलाती है...नरेश मीणा ने SDM को थप्पड़ मारा! नरेश मीणा को जेल भेजा गया, पर क्लोग ये सवाल उठा रहे हैं कि क्या SDM और IAS यानि कलेक्टर मैडम की कोई गलती नहीं है?
या जिन IAS अधिकारियों पर सीधे मुख्यमंत्री का आशीर्वाद प्राप्त होता है उनपर कोई सवाल ही नहीं उठाया जा सकता है! इस बात पर PMO यानि प्रधानमंत्री कार्यालय की भी नज़र है! ख़बर है कि बहुत जल्द सौम्या झा का तबादला टोंक से किसी और जिले के लिए किया जा सकता है? चर्चा है कि ये घटना राजस्थान की राजनीति के लिए सामान्य नहीं है...
भजन लाल जब राजस्थान के CM बने तो कुछ महीने बाद ही उन्होंने कई दर्जन IAS अधिकारियों का तबादला किया था...टोंक की राजनीतिक परिस्थिति ऐसी है कि वहां कोई अनुभवी कलेक्टर भेजा जाता है! फिर अचानक टोंक जिले का कलेक्टर सौम्या झा को बनाकर क्यों भेजा गया? आपको एक-दो केस याद दिलाते हैं!
UP के प्रतापगढ़ में साल 1997 में एक IPS जसबीर सिंह की पोस्टिंग बतौर जिला कप्तान होती है! SP बनकर गए जसबीर सिंह का ठीक ऐसे ही पंगा हो गया! राजा भैया के ख़िलाफ़ उन्होंने ठीक ऐसा ही मोर्चा आज से 27 साल पहले खोल दिया था. देखते ही देखते राजा भैया बड़े नेता बन गए! साल 2002 में जेल में डालने के बाद भी मायावती उनको नहीं रोक पाई!
नतीजा 2024 में राजा भैया के बेहद करीबी योगी आदित्यनाथ ने IPS जसबीर को नौकरी से हमेशा के लिए सेवा मुक्त कर दिया! नरेश मीणा की घटना को क्या रोकी जा सकती थी? जब UPSC में इंटरव्यू होता है तो यही देखा जाता है कि आप विषम हालात में कैसे निपटते है...एक पक्ष यहां तक कि राजस्थान के ही कुछ कलेक्टर दबी जुबान ये बात रहे हैं कि इस घटना को रोका जा सकता था!
विषम हालात में सौम्या झा ने सुझ-बुझ का प्रयोग करने के बजाय बल का प्रयोग किया! किसी ज़िले में अगर 12 बजे तक वोटिंग नहीं होती है तो वो फेलियर जिला अधिकारी का ही माना जाएगा! एक चर्चा और हैं...भजन लाल शर्मा ने नए अधिकारियों को इसलिए मौका दिया हैं, क्योंकि पुराने अधिकारी राजस्थान के तो वसुंधराराजे सिंधिया या फिर अशोक गहलोत के ख़ास है? इसलिए नए-नए अधिकारियों पर उनको यक़ीन है...हालांकि नरेश मीणा की घटना ने सौम्या को अगर सिंघम स्टाइल की IAS के तौर पर पहचान दिलाई तो वही सवाल भी उठाया कि क्या ये घटना रोकी जा सकती थी?