नई दिल्ली: गोरखपुर के बड़हलगंज थाना क्षेत्र में एक बार फिर पुलिस की छवि पर सवाल खड़े हो गए हैं. यहां एक उपनिरीक्षक पर गंभीर इल्ज़ाम लगे हैं, जिसमें एक युवक के साथ मारपीट और रिश्वत वसूलने का मामला शामिल है. पीड़ित युवक, जो खड़ेसरी गांव का रहने वाला बबलू सोनकर है, का कहना है कि उनकी पत्नी विद्या देवी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या से जूझ रही हैं.
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इसी स्थिति में पत्नी ने उनके खिलाफ थाने में एक शिकायत दर्ज करा दी थी. इस शिकायत के सिलसिले में 27 जनवरी 2026 को उपनिरीक्षक अनुराग कुमार सिंह ने बबलू को फोन करके थाने बुलाया. बबलू के अनुसार, थाने पहुंचने पर रात करीब 9 बजे सब-इंस्पेक्टर ने उन्हें गालियां दीं और जमकर पीटा. पिटाई इतनी तेज थी कि उनकी पीठ पर गंभीर चोटें आईं.
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युवक का आरोप है कि मारपीट के दौरान उन्हें गंभीर धाराओं में फंसाने और जेल भेजने की धमकी भी दी गई. अंत में, उन्हें छोड़ने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई. डर के मारे बबलू ने अपने भाई सुनील सोनकर से पैसे मंगवाए और कथित रूप से अधिकारी को सौंप दिए, जिसके बाद उन्हें रिहा किया गया. इस पूरे घटनाक्रम से व्यथित बबलू ने गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से लिखित शिकायत की है. उन्होंने दोषी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
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दूसरी ओर, कोतवाली के प्रभारी इंस्पेक्टर (क्राइम) विनय यादव ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है. उनका कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है. यह घटना गोरखपुर पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठा रही है, क्योंकि ऐसी शिकायतें पुलिस की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं.