लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर नाम कटने का विवाद तेज हो गया है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग करके विशेष रूप से PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं.
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लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश ने कहा कि बीजेपी चुनाव आयोग के साथ मिलकर यह साजिश रच रही है. उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल के उदाहरण देते हुए दावा किया कि इसी तरह की रणनीति से वहां चुनाव प्रभावित हुए थे. बिहार में SIR के जरिए माहौल बिगाड़ा गया, जबकि बंगाल में ममता बनर्जी को विरोध में काला कोट पहनना पड़ा.
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उन्होंने दो खास मामलों का जिक्र किया. एक दशरथ कुमार और दूसरा नंदलाल. इन नामों को त्रेता और द्वापर युग से जोड़ते हुए कहा कि सनातन आस्था वाले लोग भी इस धांधली का शिकार हो रहे हैं. नंदलाल (सुल्तानपुर जिले से) का मामला सामने लाया गया, जहां उनके नाम से कई फॉर्म-7 जमा किए गए थे, जबकि वे अनपढ़ हैं और सिर्फ अंगूठा लगाते हैं. अखिलेश ने दावा किया कि बीजेपी ने उन्हें फॉर्म भरवाए थे, लेकिन अब नंदलाल सपा के साथ खड़े हैं.
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इस बहादुरी के लिए अखिलेश ने नंदलाल को एक लाख रुपये का इनाम दिया और उनके गांव में बन फॉर्म-7 के फर्जी हस्ताक्षर के मामलों में धारा 31-32 के तहत कार्रवाई हो, दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाए. उन्होंने अपने पीडीए प्रहरियों को ऐसे मामलों को उजागर करने के निर्देश दिए और कहा कि प्रदेश में माहौल बिगाड़ने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह मुद्दा लगातार गरमाया हुआ है, जहां सपा इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, जबकि बीजेपी के पक्ष से ऐसे आरोपों को खारिज किया जा रहा है.