Operation KGH: जब पूरा देश ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा कर रहा था, BSF और इंडियन आर्मी के शौर्य की कहानियां सुनाई जा रही थी. तब भारत-पाकिस्तान से बॉर्डर से सैकड़ों किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ और तेलंगाना बॉर्डर पर ऑपरेशन KGH यानि कुर्रुगुट्टालु हिल्स पर बड़ा एक्शन चल रहा था, जिसमें छत्तीसगढ़ पुलिस की डीआरजी, कोबरा, एसटीएफ और सीआरपीएफ के जवान शामिल रहे. ये ऑपरेशन इतना बड़ा और भीषण था कि लगातार 21 दिनों तक कार्रवाई होती रही, और उसके बाद जो बरामद हुआ, उसकी पूरी कार्रवाई 5 लाइन में समझिए. फिर बताते हैं सेना के जवानों ने इस दुर्गम रास्ते पर कैसे विजय प्राप्त की.
इनमें से 28 नक्सलियों पर 1 करोड़ 72 लाख का इनाम था. ये कार्रवाई इतनी मुश्किल थी कि 45 डिग्री तापमान में रस्सियों के सहारे जवानों को पहाड़ों पर चढ़ना पड़ा, गर्म पहाड़ में उनके हाथ तप रहे थे, लेकिन हौसला अडिग था. इन 21 दिनों में उन जवानों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट यानि खाना और जरूरी सामान हेलीकॉप्टर से पहाड़ पर ही पहुंचाया जा रहा था. इस दौरान नक्सलियों से बचते-बचाते जवान उनके अड्डे तक पहुंचे, सामने से कोई हिमाकत होती तो उसका जवाब कैसे दिया गया, इसके लिए एक वीडियो भी जारी किया गया.
वीडियो भी जारी किया गया
करीब 8 मिनट का वीडियो भी जारी किया गया है, जो साफ बताता है ऑपरेशन KGH ने नक्सलियों पर बड़ी चोट की है. ये वो जगह थी, जहां कभी भी 300-400 की संख्या में नक्सली जमा होते, देश को दहलाने का प्लान बनाते औऱ फिर अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षाबलों को निशाना बनाया जाता, जैसे झारखंड के बुढ़वा पहाड़ पर दशकों से लाल झंडा लहरा रहा था, ठीक वैसे ही यहां भी दुश्मनों ने अड्डा बना रखा था, कभी भी पुलिस जाने की हिम्मत करती तो पहाड़ी से ही नक्सली हमला कर देते, इसीलिए इस बार जवानों ने फुलप्रूफ नीति अपनाई.
केंद्र ने तैयार की योजना
दोनों राज्यों के साथ-साथ केन्द्र से समन्वय बनाया, और गृहमंत्री शाह (Amit Shah) के आदेश पर काली पहाड़ी के हिस्से पर नक्सलवाद के अंधेरे रात का अंत कर दिया. ये ऑपरेशन शौर्य, समर्पण और समन्वय की वो मिसाल है, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा. जिन प्राकृतिक झरनों का इस्तेमाल देश के दुश्मन अपने लिए करते थे, उन झरनों से लेकर जंगल और पहाड़ तक अब आम जनता के लिए महफूज हो गए हैं. नतीजा साल 2014 में जो 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, अब घटकर 2025 में उनकी संख्या सिर्फ 18 हो गई है.
नक्सली खुद भी कर रहे सरेंडर
बड़ी संख्या में नक्सली खुद भी सरेंडर कर रहे हैं, साल 2024 में जहां 928 ने सरेंडर किया तो वहीं इस साल मई महीने तक ही 718 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया. क्योंकि उन्हें पता है अब हमारे लिए भारत में कोई महफूज जगह नहीं बची, आप ये जानकर शायद दंग रह जाएं कि इस ऑपरेशन में 18 जवान घायल हुए, ज्यादा गर्मी की वजह से कई जवानों की तबियत बिगड़ी लेकिन एक भी शहादत नहीं हुई, जो इनके सफल रणनीति को दिखाता है. जवानों की इस सफलता पर गृहमंत्री शाह ने ट्वीट कर बधाई दी है.
नक्सलमुक्त भारत (nasclite Free India) के संकल्प में एक ऐतिहासिक सफलता प्राप्त करते हुए सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के विरुद्ध अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन में छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के कुर्रुगुट्टालु पहाड़ (KGH) पर 31 नक्सलियों को ढेर कर दिया. जिस पहाड़ पर कभी लाल आतंक का राज था, वहां आज शान से तिरंगा लहरा रहा है.
गृहमंत्री शाह के इस ट्वीट को पीएम मोदी भी रिट्वीट करते हैं और लिखते हैं
“सुरक्षाबलों की सफलता बताती है नक्सलवाद के खिलाफ हमारा अभियान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है.”
ये मोदी-शाह के संकल्प का ही नतीजा है कि बीते कुछ सालों में नक्सलवाद के विरुद्ध ऑपरेशन में तेजी आई है और 31 मार्च 2026 तक भारत नक्सलमुक्त होने जा रहा है.