क्या आप जानते हैं कि आज भी देश में राजा-महाराजाओं वाली प्रथा चलती है? क्या आज भी किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का खाना पहले चखा जाता है उसके बाद ही वो व्यक्ति खाना खाता है? आप लोग समझ तो गए होंगे कि हम यहां देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की बात कर रहे हैं. जी हाँ देश के दो सबसे बड़े और सम्मानित पदों पर बैठे व्यक्तियों का खाना पहले चखा जाता है उसके बाद ही राष्ट्रपति और पीएम के सामने परोसा जाता है. ऐसे में सभी के ज़हन में जो सबसे बड़ा सवाल आता है वो ये कि आखिर कौन है जो खाना पीएम और राष्ट्रपति का खाना चखता है. कौन है जो अपनी जान भी जोखिम में डालता है?
अगर आप ये सोच रहे हैं कि खाना इसलिए टेस्ट किया जाता है जिससे स्वाद में ऊंच नीच न हो जाए. खाने का टेस्ट अच्छा होना चाहिए वगैरह-वगैरह। लेकिन आपकी ये सोच गलत है. दरअसल ऐसा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत देश के सभी वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाता है. ये एक प्रोटोकॉल है. इसके मुताबिक प्रधानमंत्री खाना बनने के बाद सीधे खाना नहीं खा सकते हैं.
लेकिन क्या आप जानते है कि इसके लिए बाकायदा एक टीम रखी जाती है. जिन्हें फ़ूड टेस्टर कहा जाता है. इनका काम होता है कि पीएम और राष्ट्रपति के लिए बने खाने को पहले टेस्ट करना. जानकारों का मानना है कि ये काफी जोखिम भरा जॉब है. क्योंकि इसमें फ़ूड टेस्टर की जान को खतरा भी हो सकता है. दरअसल दुनियाभर में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब किसी वीवीआईपी के खाने में जहर डालकर उनकी जान लेने की कोशिश हुई है. ऐसे में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आवास में खाना बन रहा हो या आवास के बाहर किसी दौरे पर हों उनका भोजन बनने के बाद पहले फ़ूड टेस्टर टेस्ट करते हैं तभी पीएम या राष्ट्रपति खाते हैं.
ये प्रोटोकॉल कोई नया नहीं है बल्कि राजा महाराजाओं के समय से ये प्रथा चली आ रही है. पुराने समय में रॉयल परिवारों में फूड टेस्टर हुआ करते थे.जो राजपरिवार के लिए बने खाने को चखते थे और अगर वो सही सलामत है तो ये बात साबित हो जाती थी कि खाना पूरी तरह सुरक्षित है. कई रिपोर्ट्स बताती है कि ये प्रोटोकॉल सिर्फ भारत में ही नहीं लगभग सारे देशों में है. हर देश सीक्रेट तौर पर फूड टेस्टर रखता है.
क्योंकि कई जहर ऐसे होते हैं जिन्हें खाने में मिलाकर किसी की जान ली जाती है. जैसे सायनाइड,आर्सेनिक ट्रायऑक्साइड और एट्रोपाइन. सभी ज़हर अलग-अलग तरह से काम करते हैं लेकिन एक लक्षण सब में एक जैसा है कि जहर वाला खाना खाने के बाद उस उल्टियां होती हैं. इसलिए कहा जाता है कि फ़ूड टेस्टर का काम जोखिम भरा होता है वो हर रोज़ अपनी जान जोखिम में डालता है.