काकीनाडा (आंध्र प्रदेश): तीर्थस्थल पर MRP से ज्यादा कीमत वसूलने वाले एक मंदिर दुकानदार पर उपभोक्ता आयोग ने भारी जुर्माना ठोक दिया है. काकीनाडा जिला उपभोक्ता आयोग ने मंदिर की लाइसेंसधारी दुकान को ₹7 लाख का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है. यह राशि उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करानी होगी.
क्या था मामला?
22 फरवरी 2026 को डी. वेंकटेश्वर राव अन्नावरम स्थित श्री वीरा वेंकट सत्यनारायण स्वामी मंदिर गए थे. उन्होंने मंदिर की लाइसेंसधारी दुकान से एक लीटर पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर की बोतल खरीदी. बोतल पर MRP ₹18 छपा था, लेकिन दुकानदार ने UPI के जरिए ₹25 वसूल लिए. जब राव ने कीमत पर सवाल किया तो दुकानदार ने कहा कि उसे MRP से ज्यादा कीमत पर बेचने का अधिकार है. राव ने मंदिर प्रशासन को व्हाट्सऐप पर शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
दुकानदार का पक्ष था कि राव ने पानी की बोतल के अलावा ₹20 का कॉल ड्रिंक और ₹5 का बिस्किट पैकेट भी खरीदा था, इसलिए ₹25 का भुगतान हुआ. मंदिर प्रशासन ने भी कहा कि दुकान स्वतंत्र लाइसेंसधारी चलाता है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की गई थी.
आयोग ने क्या कहा?
आयोग (प्रेसिडेंट च. रघुपति वसंता कुमार व अन्य सदस्यों) ने UPI पेमेंट प्रूफ, बोतल की फोटो और अन्य सबूतों के आधार पर राव का पक्ष सही माना. लाइसेंसधारी अपने दावे के समर्थन में ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका. आयोग ने साफ कहा कि पैकेज्ड प्रोडक्ट पर छपी MRP अधिकतम कानूनी कीमत है. इससे ज्यादा वसूलना “अनुचित व्यापार व्यवहार” और सेवा में कमी है.
तीर्थस्थल पर जहां रोज हजारों भक्त आते हैं, वहां पीने के पानी जैसी जरूरी चीज पर ज्यादा पैसे वसूलना और भी गंभीर अपराध है, क्योंकि भक्तों के पास मोलभाव का मौका नहीं होता. आयोग ने मंदिर प्रशासन के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी, क्योंकि कोई सबूत नहीं मिला कि प्रशासन ने ज्यादा कीमत वसूलने का निर्देश दिया था.
हालांकि मंदिर प्रशासन को निर्देश दिए गए कि सभी लाइसेंसधारी दुकानों पर MRP साफ-साफ प्रदर्शित की जाए. हर घंटे घोषणा की जाए कि MRP पर ही सामान खरीदा जाए. भक्तों के लिए प्रभावी शिकायत व्यवस्था बनाई जाए.
क्या-क्या जुर्माना लगाया गया?
लाइसेंसधारी को उपभोक्ता कल्याण कोष में ₹7 लाख जमा करने होंगे (सजा के रूप में). राव को ₹7 वापस करने होंगे. राव को ₹10,000 मुआवजा और ₹5,000 मुकदमे की लागत देनी होगी. आदेश 45 दिनों में पालन करना होगा, नहीं तो 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी लगेगा.
आयोग ने कहा कि सिर्फ ₹7 वापस करने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि इससे कई अन्य उपभोक्ताओं से अवैध वसूली का फायदा दुकानदार को मिलता रहेगा. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का मकसद सिर्फ एक व्यक्ति को मुआवजा देना नहीं, बल्कि पूरे समाज को अन्याय से बचाना है. यह आदेश तीर्थस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर MRP से ज्यादा वसूली के खिलाफ सख्त संदेश है.