मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक पालतू कुत्ते की मौत के बाद उसके परिवार ने जिस तरह से अंतिम संस्कार और तेरहवीं की रस्म निभाई, वह चर्चा का विषय बनी हुई है. रायबरेली के सुनील यादव डीएन इंटर कॉलेज में माली के पद पर काम करते हैं. उनके परिवार ने लंबे समय से एक देसी नस्ल का कुत्ता पाल रखा था, जिसका नाम प्यार से टफ्फू रखा गया था. परिवार के लिए टफ्फू सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि घर के सदस्य जैसा था.
बताया गया कि सुनील यादव की बेटी वर्षा का टफ्फू से खास लगाव था. वह उसे परिवार के किसी सदस्य की तरह प्यार करती थी और यहां तक कि रक्षाबंधन के मौके पर टफ्फू को राखी भी बांधती थी. घर में टफ्फू के साथ बच्चों की तरह व्यवहार किया जाता था. उसकी मौजूदगी परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी.
कुछ समय पहले टफ्फू की मौत हो गई. उसकी मौत से परिवार को गहरा दुख पहुंचा. परिवार ने टफ्फू की याद में बाकायदा हवन-पूजन करवाया और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ कार्यक्रम आयोजित किया. इसके बाद उसकी तेरहवीं भी कराई गई, जिसमें रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के लोगों को आमंत्रित किया गया.
तेरहवीं के आयोजन को सामान्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम की तरह ही रखा गया। मेहमानों के लिए भोजन तैयार कराने के लिए हलवाई लगाए गए. खास बात यह रही कि टफ्फू को बूंदी के लड्डू बेहद पसंद थे. इसलिए तेरहवीं में शामिल लोगों को बूंदी के लड्डू भी बांटे गए.
परिवार का कहना है कि टफ्फू ने वर्षों तक उनके घर में रहकर परिवार का हिस्सा बनकर जिंदगी बिताई. ऐसे में उसकी मौत के बाद उसके प्रति सम्मान और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उन्होंने यह आयोजन किया. पालतू जानवर और इंसान के बीच भावनात्मक रिश्ते की यह कहानी अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.