नई दिल्ली: गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी (DM) मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें उन्हें कड़ी फटकार लगाई गई थी और उनके वेतन से 5 लाख रुपए मुआवजा कटाने का निर्देश दिया गया था. यह मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी की 25 वर्षीय छात्र-कार्यकर्ता अकृति चौधरी से जुड़ा है. अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. बाद में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगा दिया गया था.
2 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अकृति चौधरी के NSA निरोध आदेश को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि यह निरोध राज्य द्वारा गढ़े गए कहानी पर आधारित था. कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए. हाईकोर्ट ने DM मेधा रूपम पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका यह कदम तानाशाही वाला था.
कोर्ट ने चेतावनी दी कि अधिकारियों के ऐसे भ्रष्ट व्यवहार से उत्तर प्रदेश ऑरवेलियन डिस्टोपिया बन सकता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की वफादारी संविधान के प्रति होनी चाहिए, न कि राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति. अधिकारियों को याद रखना चाहिए कि वे जनता के सेवक हैं और लोकतंत्र में जनता ही मालिक है.
कोर्ट ने अकृति चौधरी को 5 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया और यह राशि मेधा रूपम तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों के वेतन से काटने का निर्देश दिया. साथ ही कोर्ट की नाराजगी उनके सेवा रिकॉर्ड में दर्ज करने को भी कहा. 9 सितंबर को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाएगी. अब DM मेधा रूपम ने खुद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है. मामले में आगे की सुनवाई का इंतजार है.