नई दिल्ली : भारत मंडपम आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक सक्रियता ने दुनिया का ध्यान खींचा. तीन दिनों के सम्मेलन में पीएम मोदी ने करीब 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं, इसके अलावा कई नेताओं के साथ अनौपचारिक मुलाकात और बातचीत भी हुई. यानी BRICS मंच भारत के लिए सिर्फ बहुपक्षीय बैठक नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों को मजबूत करने का बड़ा कूटनीतिक प्लेटफॉर्म बना.
पीएम मोदी की अहम मुलाकातों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत सबसे ज्यादा चर्चा में रही. पुतिन के साथ बैठक में भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई. वहीं, शी जिनपिंग के साथ बातचीत में भारत-चीन संबंधों को स्थिर बनाने और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर जोर दिखाई दिया.
BRICS के अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ भी प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर बातचीत की. इन बैठकों में आर्थिक सहयोग, निवेश, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे.
भारत BRICS को पश्चिमी देशों के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में देखता रहा है. ऐसे में पीएम मोदी की लगातार बैठकों का मकसद भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना भी रहा.
तीन दिनों में 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें इस बात का संकेत हैं कि BRICS सम्मेलन के दौरान भारत ने एक साथ कई मोर्चों पर कूटनीतिक संवाद को गति दी. रूस से लेकर चीन और अन्य BRICS साझेदारों तक, पीएम मोदी की यह मैराथन डिप्लोमेसी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का बड़ा संदेश देती नजर आई.