नई दिल्ली : भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पश्चिम बंगाल सरकार ने पूर्वी मिदनापुर जिले के जुनपुट में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के नए परीक्षण केंद्र की स्थापना को मंजूरी दे दी है. इस फैसले से देश के मौजूदा मिसाइल परीक्षण ढांचे पर दबाव कम होने की उम्मीद है, खासकर ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज का बोझ घटेगा.
जुनपुट में प्रस्तावित यह सुविधा बंगाल की खाड़ी के तट पर करीब 8.73 एकड़ जमीन में विकसित की जाएगी. यहां मुख्य रूप से छोटी दूरी की मिसाइलों और रडार प्रणालियों से जुड़े परीक्षण किए जा सकेंगे. समुद्र के किनारे रणनीतिक रूप से स्थित होने के कारण यह जगह रक्षा प्रणालियों के परीक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
अभी भारत के कई मिसाइल और हथियार प्रणालियों के परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में किए जाते हैं. लगातार बढ़ती रक्षा अनुसंधान और परीक्षण गतिविधियों के बीच एक अतिरिक्त परीक्षण केंद्र तैयार होने से DRDO को अपनी टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
जुनपुट केंद्र का इस्तेमाल नई मिसाइल प्रणालियों, सेंसर और रडार तकनीक के परीक्षण के लिए किया जा सकता है. इससे परीक्षण कार्यक्रमों को अधिक लचीला बनाने और अलग-अलग रक्षा परियोजनाओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी.
पूर्वी भारत में इस तरह की रणनीतिक रक्षा सुविधा का विकास क्षेत्र की सुरक्षा और तकनीकी क्षमता के लिहाज से भी अहम है. DRDO स्वदेशी मिसाइल, रडार और अन्य रक्षा तकनीकों के विकास पर लगातार काम कर रहा है. ऐसे में जुनपुट टेस्टिंग सेंटर भविष्य की रक्षा परियोजनाओं के लिए एक अतिरिक्त परीक्षण आधार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.