नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने शनिवार रात भारत मंडपम के पास प्रदर्शन कर रहे तिब्बती यूथ कांग्रेस (TYC) के 50 से अधिक सदस्यों को हिरासत में लिया. ये प्रदर्शन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भागीदारी और भारत मंडपम में आयोजित डिनर व सांस्कृतिक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति के खिलाफ था. प्रदर्शनकारियों ने भारत मंडपम के नजदीक मंडपम भैरों मार्ग पर जमा होकर “फ्री तिब्बत”, “चीन तिब्बत से बाहर निकलो” और शी जिनपिंग के खिलाफ नारेबाजी की. TYC के विभिन्न क्षेत्रीय अध्यायों के सदस्यों ने भाग लिया.
पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें दिल्ली के अलग-अलग थानों (जैसे मंडावली, अशोक विहार, गोकुलपुरी और गाजीपुर) में रखा. कुछ रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 60 से अधिक बताई गई है, जिसमें TYC के वाइस प्रेसिडेंट ताशी तर्ग्याल और अन्य नेता भी शामिल हैं. यह घटना ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (12-13 सितंबर 2026) के दौरान हुई, जिसमें शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आए थे.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात भी की. इससे पहले 11 सितंबर को भी तिब्बती समुदाय ने मजनू का टीला में प्रदर्शन किया था और स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत (SFT) के कुछ कार्यकर्ताओं को भारत मंडपम के पास झंडे और बैनर लहराने पर हिरासत में लिया गया था.
TYC ने शी जिनपिंग की भागीदारी की निंदा करते हुए कहा कि वे तिब्बत में सांस्कृतिक दमन और जबरन assimilation की नीतियों के जिम्मेदार हैं. संगठन ने चीन के “एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ” को भी “नरसंहार कानून” बताते हुए उसकी आलोचना की और भारत व अन्य ब्रिक्स देशों से तिब्बत के मानवाधिकार मुद्दे को उठाने की अपील की. प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने कार्रवाई की.
दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार कुछ रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 30 से अधिक बताई गई, जबकि TYC और अन्य स्रोतों ने 50 से ऊपर का आंकड़ा दिया. हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की रिहाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है.