नई दिल्ली : राष्ट्रपति भवन में इन दिनों एक नई वर्दी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है. यह वर्दी है मेजर नव्या शेखावत की, जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की टीम में बेहद खास जिम्मेदारी मिली है. मेजर नव्या शेखावत भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी हैं, जिन्हें राष्ट्रपति की Aide-de-Camp यानी ADC के रूप में नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति सेना के साथ-साथ देश की महिलाओं के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है.
लेकिन सवाल है कि राष्ट्रपति की ADC की जिम्मेदारी आखिर इतनी खास क्यों है. ADC राष्ट्रपति के बेहद करीबी सैन्य सहयोगी के तौर पर काम करता है. आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के साथ रहना, सैन्य प्रोटोकॉल और कार्यक्रमों के समन्वय में भूमिका निभाना और महत्वपूर्ण अवसरों पर राष्ट्रपति के साथ प्रतिनिधित्व करना इस जिम्मेदारी का हिस्सा होता है. ऐसे पद के लिए अधिकारी की अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सैन्य दक्षता और व्यक्तित्व को बेहद अहम माना जाता है.
मेजर नव्या शेखावत की नियुक्ति इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले राष्ट्रपति की ADC टीम में महिला अधिकारियों की मौजूदगी रही है, लेकिन Army से राष्ट्रपति की ADC बनने वाली वह पहली महिला अधिकारी बनी हैं. इससे पहले विंग कमांडर पूजा ठाकुर ने 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ADC बनकर इतिहास रचा था. वह राष्ट्रपति की ADC बनने वाली पहली महिला अधिकारी थीं, लेकिन वह भारतीय वायुसेना से थीं.
मेजर नव्या की नियुक्ति भारतीय सेना में महिलाओं की लगातार बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है. सेना में महिलाओं को अब कमांड, ऑपरेशनल और महत्वपूर्ण संस्थागत जिम्मेदारियों में अधिक अवसर मिल रहे हैं. राष्ट्रपति भवन जैसी सर्वोच्च संवैधानिक संस्था में आर्मी ADC की भूमिका मिलना इसी बदलते दौर की बड़ी तस्वीर पेश करता है.
मेजर नव्या शेखावत की यह जिम्मेदारी सिर्फ एक पोस्टिंग नहीं, बल्कि भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के बढ़ते कद और बदलते अवसरों का बड़ा संकेत है.