नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती घटकर सिर्फ एक रह गई है. इसके अलावा पूरे साल में पत्थरबाजी की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में 146, 2022 में 121, 2023 में 19, 2024 में सिर्फ 4 और 2025 में केवल 1 स्थानीय युवा आतंकी बने.
यह लगातार गिरावट का रुझान दिखाता है. सुरक्षा बलों ने 2025 में कुल 19 आतंकियों को निष्क्रिय किया, जिनमें से 8 पाकिस्तानी मूल के थे. एलओसी पर घुसपैठ के प्रयास भी वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए. 2025 में सिर्फ 6 प्रयास दर्ज हुए, जिनमें 12 पाकिस्तानी आतंकी मारे गए. 2021 में 8, 2022 में 12, 2023 में 18, 2024 में 10 और 2025 में 6 बार प्रयास हुए.
2021 से 2025 के बीच कुल 97 आतंकी घुसपैठ के दौरान मारे गए. हालांकि, आतंकी गतिविधियां अब अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की ओर शिफ्ट हो रही हैं, जहां नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी ज्यादा हो रही है. एलओसी पर सीजफायर उल्लंघन 2025 में बढ़कर 163 हो गए. इनमें से 124 घटनाएं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुईं.
तुलना में 2024 में सिर्फ 2, 2023 में शून्य और 2022 में 1 उल्लंघन हुए थे. फिर भी ये आंकड़े पिछले वर्षों (2021 में 594, 2020 में 4,645) से काफी कम हैं. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति मजबूती से नियंत्रण में है. केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों और नीतियों के कारण हिंसा का स्तर घटा है, प्रदर्शन कम हुए हैं और पत्थरबाजी की घटनाएं पूरी तरह समाप्त हो गई हैं. पर्यटन में बढ़ोतरी भी क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि का संकेत है. ये आंकड़े घाटी में सुधरते माहौल को रेखांकित करते हैं.