उत्तर कोरिया के बाद अब इंडियंस पर खतरा? रूस-यूक्रेन युद्ध में एक भारतीय की मौत, इस राज्य का था शख्स...

Global Bharat 14 Jan 2025 06:20: PM 2 Mins
उत्तर कोरिया के बाद अब इंडियंस पर खतरा? रूस-यूक्रेन युद्ध में एक भारतीय की मौत, इस राज्य का था शख्स...

नई दिल्ली: रूस में एक भारतीय नागरिक की मौत के बाद भारत ने संघर्ष क्षेत्र में रूसी सेना में काम कर रहे अन्य भारतीयों को जल्द वापस भेजने की अपनी मांग दोहराई. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमें केरल के एक भारतीय नागरिक की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के बारे में पता चला है, जिसे जाहिर तौर पर रूसी सेना में सेवा देने के लिए भर्ती किया गया था. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में केवल 19 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों में बचे हैं. सरकार ने संबंधित रूसी अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे रूसी सशस्त्र बलों में शामिल शेष भारतीय नागरिकों के ठिकानों के बारे में जानकारी प्रदान करें और उनकी सुरक्षा, कल्याण और शीघ्र छुट्टी सुनिश्चित करें.

केरल का एक अन्य भारतीय नागरिक, घायल हो गया है और उसका मॉस्को के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है. जायसवाल ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि मॉस्को में भारतीय दूतावास परिवारों के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है. उन्होंने बताया कि मृतक का पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए भारतीय दूतावास रूसी अधिकारियों के साथ काम कर रहा है.

अधिकारी ने कहा कि हमने घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द छुट्टी देने और भारत वापस भेजने की भी मांग की है. इस मामले को आज मॉस्को में रूसी अधिकारियों के साथ-साथ नई दिल्ली में रूसी दूतावास के समक्ष भी जोरदार तरीके से उठाया गया है. हमने शेष भारतीय नागरिकों को भी जल्द से जल्द छुट्टी देने की अपनी मांग दोहराई है. यूक्रेन युद्ध में रूस के लिए लड़ रहे भारतीय नागरिकों की स्थिति भारत के लिए एक बड़ी चिंता बन गई है.

भारत कहता रहा है कि संघर्ष की स्थिति में रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती भारत-रूस कूटनीतिक साझेदारी के अनुरूप नहीं है. नई दिल्ली ने ऐसे सभी भारतीय नागरिकों की जल्द छुट्टी देने और वापसी की मांग की है. पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉस्को की ऐतिहासिक यात्रा के बाद रूस ने यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेना के लिए लड़ रहे सभी भारतीयों को छुट्टी देने और उनकी वापसी में मदद करने का फैसला किया था.

यह तब हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन द्वारा आयोजित एक प्राइवेट डिनर में इस मामले को उठाया. अधिकारियों के अनुसार, कई भारतीयों को उच्च वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर युद्ध में भेजा गया था. ऐसे एजेंट्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने पिछले महीने संसद को बताया था कि सरकार के ठोस प्रयासों के परिणामस्वरूप, रूसी सशस्त्र बलों में शामिल अधिकांश भारतीय नागरिकों को छुट्टी दे दी गई है और कई को भारत वापस भेज दिया गया है.

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