ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदले दुनिया के सुर, चीन ने कार्रवाई को बताया खेदजनक तो इजरायल बोला- ये कदम जरूरी था 

Rahul Jadaun 07 May 2025 02:46: PM 5 Mins
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदले दुनिया के सुर, चीन ने कार्रवाई को बताया खेदजनक तो इजरायल बोला- ये कदम जरूरी था 

नई दिल्ली: भारत ने हाल ही में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक सैन्य हमले किए, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. इन हमलों ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, और विश्व नेताओं ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है. अधिकांश नेताओं ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत व कूटनीति के जरिए तनाव को कम करने की अपील की है. यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. आइए, इस घटना और विश्व नेताओं की प्रतिक्रियाओं को विस्तार से समझते हैं.

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत 25 मिनट के भीतर, रात 1:05 बजे से 1:30 बजे तक, भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त अभियान के जरिए पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए. रक्षा मंत्रालय ने 1:44 बजे एक आधिकारिक बयान जारी कर इस ऑपरेशन की पुष्टि की. मंत्रालय के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य उन आतंकी ढांचों को नष्ट करना था, जो भारत में हमलों की योजना बनाते और उन्हें अंजाम देते थे.

हमले के निशाने पर जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर और लश्कर-ए-तैयबा का मुरिदके (लाहौर से 50 किमी दूर) जैसे प्रमुख आतंकी ठिकाने थे. सरकार ने बताया कि ये हमले विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित थे और इसका लक्ष्य आतंकवाद की रीढ़ तोड़ना था. इन हमलों में 80 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर है. यह कार्रवाई पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे.

भारत की इस सैन्य कार्रवाई ने विश्व नेताओं को प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर किया. अधिकांश नेताओं ने तनाव बढ़ने की आशंका जताई और दोनों देशों से शांति और संयम की अपील की. नीचे प्रमुख नेताओं और देशों की प्रतिक्रियाएं दी गई हैं...

अमेरिका: तनाव जल्द खत्म होने की उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सबसे पहले भारत की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने स्थिति को "शर्मनाक" बताया और उम्मीद जताई कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव जल्द खत्म होगा. ट्रम्प ने कहा, "यह बहुत शर्मनाक है. मुझे अभी इसके बारे में पता चला. शायद कुछ लोगों को पहले से अंदाजा था कि ऐसा कुछ होगा. भारत और पाकिस्तान लंबे समय से, कई दशकों से एक-दूसरे से लड़ रहे हैं. मैं उम्मीद करता हूँ कि यह जल्द खत्म हो." अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ट्रम्प की बात को दोहराया और कहा कि वह स्थिति पर नजर रख रहे हैं. उन्होंने कहा, "मैं भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति पर करीब से नजर रख रहा हूँ. मैं राष्ट्रपति की बात का समर्थन करता हूँ कि यह जल्द खत्म हो और मैं दोनों देशों के नेताओं से शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत करता रहूँगा."

इजरायल: भारत की आत्मरक्षा का समर्थन

इजरायल के भारत में राजदूत रियूवेन अजार ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया. उन्होंने कहा, "आतंकियों को पता होना चाहिए कि उनके जघन्य अपराधों से बचने की कोई जगह नहीं है. #ऑपरेशनसिंदूर." इजरायल ने भारत की इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ जरूरी कदम माना.

संयुक्त राष्ट्र: सैन्य संयम की मांग

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत के हमलों पर चिंता जताई और दोनों देशों से "अधिकतम सैन्य संयम" बरतने की अपील की. उनके प्रवक्ता ने कहा, "महासचिव नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत की सैन्य कार्रवाइयों से बहुत चिंतित हैं. वह दोनों देशों से अधिकतम सैन्य संयम बरतने की अपील करते हैं. विश्व भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव बर्दाश्त नहीं कर सकता."

चीन: कार्रवाई को "खेदजनक" बताया

चीन ने भारत की सैन्य कार्रवाई को "खेदजनक" बताया और स्थिति पर चिंता जताई. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "हम भारत की आज सुबह की सैन्य कार्रवाई को खेदजनक मानते हैं. हम स्थिति को लेकर चिंतित हैं. हम दोनों पक्षों से शांति और स्थिरता के लिए संयम बरतने और ऐसी कार्रवाइयों से बचने की अपील करते हैं, जो स्थिति को और जटिल करें." हालांकि, चीन का रुख सतर्क रहा. यह ध्यान देने योग्य है कि चीन ने पहलगाम हमले की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में निंदा को कमजोर करने में पाकिस्तान की मदद की थी.

जापान: बातचीत से समाधान की अपील

जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव योशिमासा हयाशी ने तनाव बढ़ने पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह स्थिति जवाबी कार्रवाइयों को जन्म दे सकती है और पूर्ण सैन्य संघर्ष में बदल सकती है. हयाशी ने कहा, "22 अप्रैल को कश्मीर में हुए आतंकी हमले की हम निंदा करते हैं. हम चिंतित हैं कि यह स्थिति और जवाबी कार्रवाइयों को बढ़ा सकती है. दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता के लिए, हम भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने और बातचीत से स्थिति को स्थिर करने की अपील करते हैं."

संयुक्त अरब अमीरात: कूटनीति पर जोर

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नहयान ने भारत और पाकिस्तान से तनाव कम करने की अपील की. उन्होंने कहा, "मैं भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने, तनाव कम करने और ऐसी कार्रवाइयों से बचने की अपील करता हूँ, जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति को खतरे में डाल सकती हैं." UAE ने कूटनीति और बातचीत को संकट का सबसे प्रभावी समाधान बताया. उनके बयान में कहा गया,Facing History and Ourselves "कूटनीति और बातचीत शांतिपूर्ण समाधान के सबसे प्रभावी तरीके हैं. UAE क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सभी पहलों का समर्थन करता रहेगा."

रूस: सैन्य टकराव पर चिंता

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने की अपील की.

भारत का रुख: आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कदम

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई बताया. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ये हमले उन आतंकी ढांचों को नष्ट करने के लिए किए गए, जो भारत में हमलों की योजना बनाते और निर्देशित करते थे. सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित थी और इसका उद्देश्य आतंकवाद को जड़ से खत्म करना था. भारत ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई पहलगाम हमले का जवाब थी, जिसने 26 लोगों की जान ली थी. सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताया.

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