नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने की वकालत करते हुए कहा कि भारत हिटलर की तरह नहीं है. उन्होंने संगठन के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले के विवादित बयान का पुरजोर समर्थन किया. भागवत ने शनिवार को नागपुर में एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि भारत को अन्याय और अत्याचार का विरोध तो करना चाहिए, लेकिन पाकिस्तान के आम लोगों के साथ संवाद बनाए रखना जरूरी है.
उन्होंने कहा, "हम हिटलर जैसे नहीं हैं. यह हमारा स्वभाव या तरीका नहीं है. इसलिए हमें कोई न कोई रास्ता खुला रखना चाहिए." भागवत ने होसबले के उस बयान का बचाव किया जिसमें पाकिस्तान के साथ बातचीत की खिड़की बंद न करने की बात कही गई थी. उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भविष्य में भारत पाकिस्तान को बुरी तरह हराता है, तो वहां के लोगों को या तो भारत में शामिल करना होगा या उन्हें शांति से रहने लायक बनाना होगा. इसके लिए संवाद के दरवाजे खुले रखने होंगे.
भागवत ने साफ किया कि होसबले की टिप्पणी पाकिस्तान की सरकार या देश से नहीं, बल्कि वहां के आम लोगों से संबंधित थी.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव की स्थिति बनी हुई है. RSS प्रमुख का यह नजरिया राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के संदर्भ में चर्चा का विषय बन गया है.
भागवत ने चर्चिल का हवाला भी देते हुए लोगों की शक्ति पर जोर दिया. यह बयान RSS की परंपरागत सोच से थोड़ा अलग माना जा रहा है, जो पाकिस्तान के प्रति सख्त रुख के लिए जानी जाती है. हालांकि, भागवत ने स्पष्ट किया कि संवाद का मतलब कमजोरी नहीं, बल्कि दूरदर्शी रणनीति है. यह खबर तेजी से वायरल हो रही है और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.