क्या जाने वाली है ओवैसी की लोकसभा सदस्यता, जानें क्यों उठी मांग?

Global Bharat 26 Jun 2024 03:44: PM 2 Mins
क्या जाने वाली है ओवैसी की लोकसभा सदस्यता, जानें क्यों उठी मांग?

लोकसभा अध्यक्ष बनते ही ओम बिरला क्या पहला फैसला ओवैसी की सांसदी पर लेने जा रहे हैं. क्या ओम बिरला की पहली कलम से ओवैसी की सदस्यता रद्द होने जा रही है. हैदराबाद में ऐसी चर्चा अभी से होने लगी है कि ओवैसी संसद से आउट होंगे. हैदराबाद में उपचुनाव होंगे और फिर हिंदू शेरनी माध्वी लता की संसद में एंट्री होगी, ये सारे कयास क्यों लग रहे हैं, इसका जवाब इस वीडियो में छिपा है, ये ओवैसी के शपथग्रहण का वीडियो है, जिसमें वो जय फिलीस्तीन का नारा लगा रहे हैं.

आखिर हिंदुस्तान की संसद में खड़े होकर शपथ ले रहे ओवैसी फिलीस्तीनी के समर्थन में नारा क्यों लगा रहे हैं. यही जय फिलीस्तीन का नारा अब ओवैसी के जी का जंजाल बन सकता है. सुप्रीम कोर्ट में वकील हरिशंकर जैन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मांग की है कि ओवैसी की सदस्यता रद्द की जाए, वकील विनीत जिंदल ट्वीट कर लिखते हैं.

भारत के संविधान के अनुच्छेद 103 के तहत राष्ट्रपति के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें 'फिलिस्तीन' के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिए ओवैसी को अनुच्छेद 102 (4) के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की गई है.

ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या सच में ओवैसी की सदस्यता रद्द हो सकती है. ओवैसी से यही सवाल जब संसद के बाहर पूछा गया तो एक शब्द बोलकर ओवैसी तेज कदमों से भागते हुए अंदर संसद में चले गए. ओवैसी ने क्या कहा आप भी सुनिए फिर बताते हैं नियम क्या कहते हैं.

ओवैसी खुद बैरिस्टर हैं, इसलिए उन्हें ये बात अच्छी तरह पता होगी कि आगे क्या एक्शन हो सकता है. पर संविधान के जानकार कहते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 102 और 103 के मुताबिक अगर राष्ट्रपति ने एक्शन लिया तो ओवैसी पर गाज गिर सकती है.

क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 102?

कोई व्यक्ति संसद के किसी सदन का सदस्य चुने जाने के लिए और सदस्य होने के लिए अयोग्य होगा. अगर हो भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर हो या उसे अदालत द्वारा दिमागी रूप से अक्षम घोषित किया गया हो, या दिवालिया घोषित किया गया हो, या भारत का नागरिक न हो अथवा भारत के साथ किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार करता है, या उसे संसद द्वारा पारित किसी कानून के तहत अयोग्य करार दिया गया हो.

अनुच्छेद 103 में राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि अनुच्छेद 102 के तहत कोई शिकायत प्राप्त होने पर वह संबंधित सांसद की योग्यता पर फैसला लें. फैसले से पहले चुनाव आयोग की सलाह जरूरी होती है. इसलिए ओवैसी की सांसदी जाना इतना आसान नहीं है, लेकिन कहते हैं अगर आप दूसरे देश के प्रति निष्ठा दिखाएंगे तो अपने देश के निर्वाचित प्रतिनिधि कैसे रह सकते हैं. भारत और फिलीस्तीन के रिश्ते हों या फिर भारत और इजरायल के रिश्ते ये दोनों विदेश नीति के मामले हैं. आखिर एक सांसद जो हैदराबाद से चुनकर आया है, क्या वो सिर्फ फिलीस्तीन का नारा इसलिए लगाना चाहते हैं ताकि ये बता सकें कि अपने कौम के प्रति खड़े हैं, चाहे वो दुनिया में कहीं का मामला हो. आप ओवैसी के इस बयान पर क्या कहना चाहेंगे, एक शब्द कमेंट में जरूर लिखें.

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