नई दिल्ली: भोपाल स्थित AIMIM नेता तौकीर निजामी के एक विवादास्पद बयान ने भारी आक्रोश पैदा कर दिया है. उन्होंने मुसलमानों को तीन प्रकार में बांटते हुए कहा कि कुछ जूते चाटने वाले होते हैं, कुछ जूते खाने वाले और कुछ जूते मारने वाले. उन्होंने दावा किया कि पहला प्रकार (जूते चाटने वाले) कांग्रेस में मिलते हैं, दूसरा प्रकार (जूते खाने वाले) भाजपा में, और तीसरा प्रकार (जूते मारने वाले) मजलिस (AIMIM) में पाए जाते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि जूते मारने वाला मुसलमान AIMIM का है.
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कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए निजामी ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद से कांग्रेस ने मुसलमानों को गुलामी की हालत में रखा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुसलमानों से झंडे लगवाती है और दरी बिछवाती है. पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि नाथ 100 प्रतिशत वोट मांगते हैं, लेकिन प्रतिनिधित्व के नाम पर सिर्फ दो सीटें देते हैं.
मजलिस ही गुलामी से मुक्ति का एकमात्र रास्ता है
निजामी ने कहा कि मजलिस का रास्ता ही मुसलमानों को गुलामी से आजाद करा सकता है. उन्होंने दावा किया कि दो दुकानें हैं, एक नफरत की और एक मोहब्बत की लेकिन मुसलमानों को उनके हक सिर्फ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी में मिलेंगे. स्पष्टीकरण देते हुए निजामी ने कहा कि उनका बयान हिंसा को बढ़ावा देने के लिए नहीं था, बल्कि मुसलमानों को गुलामी से मुक्त करने की कोशिश थी. उन्होंने मुसलमानों से जागने की अपील की और कहा कि वे जूते चाटने वाले या जूते खाने वाले न बनें.
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निजामी ने कहा कि मुस्लिम भाइयों, सड़कों पर निकल आओ. बिहार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां AIMIM के टिकट पर पांच विधायक चुने गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में 125 AIMIM पार्षद चुने गए हैं.
मंत्री विश्वास सारंग ने क्या कहा
निजामी के बयान से राजनीतिक तूफान उठ गया. मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जूते किससे मारेंगे? कोशिश करके देख लें. मध्य प्रदेश शांति का द्वीप है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. चाहे ओवैसी हों, ओवैसी के भाई हों या उनकी पार्टी के नेता, वे हिंसा भड़काने की बात करते हैं. वे लोगों को उकसाते हैं और उनके सिर पर सवार होकर राजनीति करते हैं. ऐसे बयान आपत्तिजनक हैं. राजनीति में ऐसी बातों की कोई जगह नहीं है. यह बयान हाल ही में वायरल हुआ है और इससे काफी विवाद खड़ा हो गया है.