लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात अभी से तेजी से बिछने लगी है. इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की लखनऊ में हुई मुलाकात ने विपक्षी खेमे की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है. दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद सपा और आप के संभावित तालमेल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
दिलचस्प बात यह है कि अखिलेश यादव पहले ही कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कह चुके हैं. ऐसे में अगर आप को भी विपक्षी गठजोड़ में जगह मिलती है तो सबसे बड़ा सवाल सीट बंटवारे को लेकर खड़ा होगा. सूत्रों के हवाले से आप के 15 से 20 सीटों पर दावेदारी की चर्चा है, हालांकि दोनों दलों ने अभी किसी गठबंधन या सीट शेयरिंग का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है.
संजय सिंह ने मुलाकात के बाद संविधान, आरक्षण और 69 हजार शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. इससे संकेत मिलता है कि दोनों दल सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों को चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनाना चाहते हैं.
लेकिन आप की एंट्री कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगी. वजह यह है कि यूपी में सपा-कांग्रेस पहले से साथ आने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, जबकि आप और कांग्रेस के बीच कई राज्यों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है. ऐसे में अखिलेश के सामने विपक्षी एकता बनाए रखते हुए सहयोगियों के बीच सीटों और भूमिका का संतुलन साधना बड़ी चुनौती होगी.
हालांकि, सपा की ओर से इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया गया है. इसलिए फिलहाल इसे पक्का गठबंधन मानना जल्दबाजी होगी. फिर भी 2027 से पहले यह मुलाकात साफ संकेत देती है कि विपक्षी दल अपनी रणनीति को लेकर नए समीकरण तलाश रहे हैं. आने वाले दिनों में असली तस्वीर सीट बंटवारे और कांग्रेस की प्रतिक्रिया से साफ होगी.