''शादीशुदा पुरुष का लिव-इन रिलेशन गैरकानूनी नहीं और कानून से बड़ा नैतिकता नहीं...'' इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Amanat Ansari 27 Mar 2026 04:06: PM 2 Mins
''शादीशुदा पुरुष का लिव-इन रिलेशन गैरकानूनी नहीं और कानून से बड़ा नैतिकता नहीं...'' इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक विवाहित पुरुष का किसी महिला के साथ लिव-इन रिलेशन में रहना कानून के तहत कोई अपराध नहीं है. अदालत ने जोर देकर कहा कि सामाजिक नैतिकता अदालत के कर्तव्य को ओवरराइड नहीं कर सकती, जो व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करना है. महिला के परिवार की तरफ से धमकियों का सामना कर रहे एक लिव-इन जोड़े की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब एक विवाहित पुरुष किसी वयस्क महिला के साथ आपसी सहमति से रहता है, तो कोई कानूनी अपराध नहीं बनता.

कोर्ट ने कहा कि कोई ऐसा अपराध नहीं है जिसमें एक विवाहित पुरुष किसी वयस्क के साथ लिव-इन रिलेशन में रहने पर, दूसरे व्यक्ति की सहमति से, किसी भी अपराध के लिए अभियोजित किया जा सके. नैतिकता और कानून को अलग रखना चाहिए. अगर कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता, तो सामाजिक राय या नैतिकता अदालत के फैसले को प्रभावित नहीं कर सकती. अदालत का कर्तव्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है.

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि महिला ने पुलिस अधीक्षक (SP) को बताया था कि वह अपनी मर्जी से उस व्यक्ति के साथ रह रही है, लेकिन फिर भी उसके परिवार की तरफ से ऑनर किलिंग (सम्मान हत्या) की धमकियों के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. अदालत ने जोर दिया कि दो वयस्कों को साथ रहने की सुरक्षा प्रदान करना पुलिस का कर्तव्य है.

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि जाहिर तौर पर पुलिस अधीक्षक ने इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है. दो वयस्कों को साथ रहने की सुरक्षा प्रदान करना पुलिस का कर्तव्य है. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस अधीक्षक पर विशेष जिम्मेदारी है.

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया और मामले को 8 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया. साथ ही कोर्ट ने जोड़े को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया और शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से उनकी सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी.

खंडपीठ ने एक संबंधित आपराधिक मामले में अंतरिम राहत भी दी और आदेश दिया कि याचिकाकर्ता अनामिका और नेत्रपाल को शाहजहांपुर में दर्ज अपहरण मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. इसके अलावा, अदालत ने महिला के परिवार को जोड़े को कोई नुकसान पहुंचाने, उनके निवास पर घुसने या उनसे सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने से रोक दिया है.

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