नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत में शराब और बीयर उद्योग पर भी दिखने लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिससे तेल, गैस और कई अन्य जरूरी सामग्रियों की सप्लाई प्रभावित हो रही है. भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से मंगवाता है, जिसमें बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरकर आता है.
साथ ही, देश में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर एलपीजी भी खाड़ी के देशों- खासकर कतर और सऊदी अरब से आती है. इन क्षेत्रों में हुए हमलों और अस्थिरता की वजह से गैस की सप्लाई में रुकावट आई है. इस संकट का सीधा असर बीयर और शराब बनाने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है. खासतौर पर बोतल पैकेजिंग की लागत तेजी से बढ़ रही है.
क्यों बढ़ रही हैं बीयर की कीमतें?
कांच की बोतलें बनाने के लिए भट्टियों को चलाने में प्राकृतिक गैस की जरूरत पड़ती है. कतर की गैस सुविधाओं पर हुए हमलों के कारण गैस की उपलब्धता घटी है, जिससे कई कांच उत्पादक कंपनियां अपना उत्पादन आंशिक या पूरी तरह रोकने को मजबूर हुई हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कांच की बोतलों की कीमत में पहले ही करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है. शिपिंग में देरी की वजह से एल्युमीनियम की सप्लाई भी प्रभावित हुई है, जो बीयर के डिब्बों (कैन) के लिए जरूरी है. इसके अलावा, कार्टन, लेबल, टेप जैसी अन्य पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में भी काफी इजाफा हुआ है.
ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी ने कहा कि इनपुट लागत में हुई बढ़ोतरी के कारण कई ऑपरेशन अब घाटे में चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि कंपनियां 12 से 15 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाने की मांग कर रही हैं. एसोसिएशन ने अपनी सदस्य कंपनियों को सलाह दी है कि वे अलग-अलग राज्यों के अधिकारियों से इस मुद्दे पर चर्चा करें.
इस एसोसिएशन में Heineken, Anheuser-Busch InBev (एबी इनबीव) और Carlsberg जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं. हालांकि इन कंपनियों की भारतीय इकाइयों ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.
कब तक चलेगा यह संकट?
ट्रंप की ओर से संघर्ष विराम की अपील के बावजूद अभी तक कोई ठोस समयसीमा तय नहीं हुई है. वहीं, देश इन दिनों गर्मियों की ओर बढ़ रहा है, जब बीयर की मांग आमतौर पर चरम पर होती है. ऐसे में अगर लागत नहीं संभली तो कंपनियों को कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं बचता. भारत में बढ़ते शहरीकरण और बढ़ती आमदनी के साथ शराब का बाजार तेजी से फैल रहा है.
अनुमानों के अनुसार, 2024 में यह बाजार लगभग 73,800 करोड़ रुपए का था और 2030 तक यह दोगुना होने की उम्मीद है. लेकिन फिलहाल गैस संकट और बढ़ती पैकेजिंग लागत इस तेजी पर ब्रेक लगाने की कोशिश कर रही है.