शिवपुरी में अपनों की ठोकरें खाकर जीते जी अपनी तेरहवीं कर रहे हैं बुजुर्ग

Amanat Ansari 14 May 2026 08:05: PM 1 Mins
शिवपुरी में अपनों की ठोकरें खाकर जीते जी अपनी तेरहवीं कर रहे हैं बुजुर्ग

Own Terahvi: शिवपुरी जिले के करैरा तहसील अंतर्गत ग्राम हाजीनगर में एक बुजुर्ग की पीड़ा ने पूरे इलाके को सोचने पर मजबूर कर दिया है. कल्याण सिंह पाल नाम के इस वृद्ध व्यक्ति ने जीते जी अपनी तेरहवीं (त्रयोदशी) का आयोजन तय कर लिया है.

16 मई 2026 को होने वाले इस कार्यक्रम के निमंत्रण कार्ड उन्होंने खुद छपवाए हैं और मोहल्ला-मोहल्ला घूमकर बांट भी रहे हैं. आमतौर पर मौत के बाद परिवार वाले शोकसंदेश बांटते हैं, लेकिन यहां मंजर उल्टा है. पिता स्वयं अपनी अंतिम क्रिया का निमंत्रण दे रहे हैं.

कार्ड पर बयां किया दर्द

कार्ड पर छपी पंक्तियों को पढ़कर किसी की भी आंख नम हो जाएगी, उन्होंने लिखा, '' मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था.'' ये सिर्फ दो लाइनें नहीं, बल्कि एक पिता का पूरा जीवन है, जिसने बच्चों के लिए सब कुछ लुटा दिया, लेकिन बुढ़ापे में अकेलापन और उपेक्षा ही हाथ लगी. मीडिया के लोगो ने जब कल्याण सिंह से फोन पर बात की गई तो उनकी आवाज में गहरी थकान और नाराजगी साफ महसूस हुई.

उन्होंने संक्षेप में कहा कि अब इस दुनिया में मेरा कोई नहीं बचा. मरने के बाद कौन तेरहवीं करेगा, इसकी क्या गारंटी है? इसलिए जीते जी ही ये रस्म पूरी कर लेना चाहता हूं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बुजुर्ग अपने परिवार के रवैये से बेहद आहत हैं. उन्होंने अपने बच्चों के लिए जितना किया, उसके बदले उन्हें सिर्फ उपेक्षा मिली. यह घटना महज एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं है. यह आज के समय की कड़वी सच्चाई है, जहां माता-पिता बुढ़ापे में बोझ बनकर रह जाते हैं.

आधुनिकता की चकाचौंध में हम कितनी तेजी से अपने रिश्तों को खोते जा रहे हैं, शिवपुरी का यह मामला उसी का दर्दनाक उदाहरण बन गया है. कल्याण सिंह पाल की यह तेरहवीं न सिर्फ उनके दर्द की गवाही देगी, बल्कि पूरे समाज के सामने एक सवाल भी रखेगी. क्या हम अपने माता-पिता के लिए इतने व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें जीते जी ही अपनी मौत का इंतजाम खुद करना पड़ रहा है?

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