Ankita Bhandari Murder Case: एक गरीब परिवार की बेटी थी. उसके पीछे BJP नेता का बेटा था.19 साल की अंकिता भंडारी हत्याकांड की कहानी आपको भावुक कर देगी! उत्तराखंड के पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक में रहती थीं. यही पर वनतरा रिजॉर्ट में अंकिता रिसेप्शनिस्ट का काम करती थीं. ये उसकी पहली नौकरी थी, पहली सैलरी से पहले ही उसकी हत्या कर दी जाती है! 17 सितंबर, 2022 को वो हर रोज की ही तरह अपने काम पर गईं. लेकिन वापस नहीं लौटीं, वो लापता हो गईं.अंकिता के साथ उस दिन क्या-क्या हुआ था? कितने लोग थे? क्या-क्या किया था? सबकुछ कोर्ट के फैसले में लिखा है! लेकिन हैरानी की बात ये है कि कोर्ट से उम्रकैद की सजा सुनने के बाद भी दोषी सौरभ भास्कर मुस्कुराते हुए हाथ हिलाकर कोर्ट से बाहर निकलता है, आखिर इसके क्या मायने हैं. पूरे मामले को समझने के लिए तीन साल पहले चलना होगा.
18 सितंबर 2022 से 24 सितंबर तक अंकिता की तलाश पूरे उत्तराखण्ड में होती है, लेकिन उसका शव नहीं मिलता है, फिर SDRF को एक संदिग्ध बॉडी नदी में मिलती है, बाद में पता चलता है कि वो अंकिता है! अंकिता केस में तीन आरोपियों पर पुलिस को शक था! जिसमें एक बीजेपी नेता विनोद आर्य का बेटा पुलकित आर्य भी था! उसके दो साथी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता भी शामिल थे! पुलकित को मुख्य आरोपी बनाया गया. लेकिन ये आरोपी था कौन? और इस पर अंकिता की हत्या के आरोप क्यों लगे? कोर्ट ने फैसले में क्या-क्या लिखा है? हम जानेंगे इस रिपोर्ट में! दरअसल, पुलकित उस ‘वनतरा रिजॉर्ट’ का मालिक था जिसमें अंकिता काम करती थी. पुलकित की ओर पहचान है. आरोपी हरिद्वार में भाजपा के नेता रहे विनोद आर्य का बेटा है. बीजेपी नेता का नाम जुड़ा तो लोग सड़कों पर आए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच SIT को सौंप दी! SIT ने अपनी जांच के बाद 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की. जिसे 2022 में ही पेश किया था. जिसमें लिखा था.
अंकिता और पुलकित के बीच विवाद हुआ था. पुलकित ने अंकिता को एक ‘वीआईपी गेस्ट’ को ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ देने के लिए कहता था! अंकिता ने मना कर दिया. इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ. एक्स्ट्रा सर्विस मतलब इशारा देह व्यापार की तरफ हो सकता है! न सिर्फ वो विरोध कर रही थी, बल्कि ये बात वो अपने दोस्त को बताने वाली भी थी, इसलिए 17 सितंबर, 2022 को अंकिता को लेकर पुलकित आर्य अंकिता भण्डारी को ऋषिकेश के चीला नहर पर लेकर जाता है! पीछे से दोनों साथी सौरभ और अंकित भी पहुंच जाते हैं! तीनों ने मिलकर अंकिता भण्डारी को नहर में धक्का देकर गिराया, 6 दिनों बाद इसी नहर में अंकिता का शव SDRF की टीम को मिली थी! SIT ने इस मामले को लेकर 97 गवाह बनाए थे. हालांकि, कोर्ट में 47 अहम गवाहों को पेश किया गया.
कोर्ट में SIT ने एक ऐसा सबूत पेश किया जिसको देखकर जज साहब भी हैरान थे, आरोपी अपना जुर्म कबूल करने के लिए तैयार हुए, क्योंकि SIT ने पुलकित आर्य के ऋषिकेश वाले रिसॉर्ट में काम करने वाले बाकी कर्मचारियों से भी पूछताछ की. ऋषिकेश जाते समय अंकिता इन लोगों के साथ थी, लेकिन वो इनके साथ लौटकर नहीं आई. इसके बाद पुलिस ने ऋषिकेश के रास्ते पर लगे हुए तमाम 500 से ज्यादा CCTV कैमरों के फुटेज की जांच करती है! ये बात साबित हुई कि रिसॉर्ट से जाते समय कुल चार लोग थे, लेकिन वापस तीन ही लौटे? अंकिता भण्डारी के हत्या के बाद पुलकित आर्य के रिसॉर्ट को जनता ने आग के हवाले कर दिया था, बीजेपी सरकार ने बुलडोज़र चलाया था, बाद में बीजेपी ने
विनोद आर्य उनके बेटे को पार्टी से बाहर निकाल दिया था. विनोद आर्य उत्तराखण्ड सरकार में मंत्री रह चुके हैं.! विनोद आर्य बीजेपी OBC मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और UP के सह प्रभारी भी थे. पुलकित के भाई अंकित आर्य को भी उत्तराखंड OBC कल्याण आयोग के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था. उनके पास राज्य मंत्री का दर्जा था, यानि पुलकित का परिवार सत्ता में था और ताकतवर था!
घटना के बाद इतना गुस्सा था कि महिलाओं ने ही तीनों आरोपियों की पिटाई कर दी थी. उनके कपड़े फाड़ दिए थे. इसलिए तीन साल के भीतर ही कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है उसकी तारीफ हर तरफ हो रही है? कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा है ज़रा देखिए! सबसे पहले कोर्ट में उस चैट को ही आधार बनाया गया जिसमें अंकिता का आख़िरी बयान था. अंकिता ने ये भांप लिया था कि बीजेपी नेता के रिसॉर्ट में देह व्यापार का धंधा होता है! उसने अपने दोस्त को मैसेज में लिखा था.
“रिसॉर्ट में बहुत इनसिक्योर फील होता है! मुझसे कहा गया है कि VIP गेस्ट आ रहे हैं, उन्हें एक्स्ट्रा सर्विस चाहिए”
इस केस की एक अच्छी बात ये है कि SIT का इंचार्ज IPS रेणुका देवी को बनाया गया था. और फैसला सुनाने वाली कोर्ट में जज रीना नेगी हैं, जिन्होंने फैसले सुनाया कि तीनों आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के लिए सबूत पर्याप्त है! कोर्ट ने पाया है कि तीनों 17 सितंबर 2022 को अंकिता को चीला नहर पर लेकर गए, इसके पहले आरोपियों ने शराब का सेवन किया था, अंकिता को वहां घुमाने के मकसद से लेकर गए, बाद में उसे नहर में फेंक दिया, मौके पर मौजूद गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिसके आधार पर कोर्ट तीनों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई!
कोर्ट में मौजूद लोग ताली बजाते हैं, अंकिता जो बेहद गरीब और सामान्य परिवार की लड़की थी, उसको 2 साल 8 महीने में इंसाफ मिल पाया, क्योंकि जनता ने उसकी आवाज़ को उठाया! अंकिता भण्डारी ने पांचवीं तक RSS के स्कूल सरस्वती विद्या मंदिर में की, फिर बाद में हाईस्कूल किया, 12वीं पास करते ही कोरोना आ गया, उसने होटल मैनजमेंट का कोर्स किया और उसकी पहली नौकरी पुलकित आर्य के रिसॉर्ट में लगी, जहां उसकी आख़िरी नौकरी भी थी! पिता बीरेंद्र सिंह भंडारी गार्ड की नौकरी करते थे, कोरोना के टाइम में नौकरी छूट गई, मां सोनी को आंगनबाड़ी में काम करना पड़ा, इसलिए अंकिता ने माता-पिता का सहारा बनने के लिए नौकरी का रास्ता चुना जहां उसे मौत मिली!